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300 फिल्में, 70 साल का करियर हिंदी सिनेमा का वो दिग्गज एक्टर जिसका आज तक कोई नहीं तोड़ पाया रिकॉर्ड

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:53 PM (IST)

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता पी जयराज ने 70 सालों तक काम किया और 300 फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं जो दशकों से यहां काम कर रहे हैं। हालांकि यहां पर एक अभिनेता आज भी ऐसा है जिन्होंने शुरुआत से लेकर आखिरी समय तक काम किया।

इसी वजह से उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है। हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के बेमिसाल एक्टर पी जयराज (P Jairaj) की जिन्होंने 70 सालों तक फिल्म इंडस्ट्री में काम किया था।

दादा साहब से किया जा चुका है सम्मानित

जसराज इंडस्ट्री का वो नायाब हीरा थे जिन्होंने मूक फिल्मों से शुरुआत की थी और टॉकीज फिल्मों (बोलने वाली फिल्में)में भी वो नजर आए। एक एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर उन्होंने छह दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री को संवारा। उन्हें प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।

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उन्हें शुरुआती हिंदी सिनेमा के प्रमुख रोमांटिक और एक्शन हीरो में से एक के तौर पर सबसे ज्यादा याद किया जाता है। उन्होंने हिंदी, मराठी, गुजराती और उर्दू भाषाओं में लगभग 170 फिल्मों में लीड एक्टर के तौर पर काम किया। उन्होंने साइलेंट फिल्म 'स्टार क्लिंग यूथ' (1929) से शुरुआत की और 'शिकारी' (1931) जैसी फिल्मों के साथ आसानी से टॉकी (बोलती फिल्मों) के दौर में आ गए।

300 फिल्मों ने आए थे नजर

इस तरह कुल 300 फिल्मों में वो नजर आए। कमाल की बात यह है कि वे तेलुगु भाषी थे, लेकिन हिंदी, गुजराती और मराठी फिल्मों में काम किया। उन्होंने 'बादबान', 'हातिम ताई', 'परदेसी' और 'रजिया सुल्तान' जैसी कई प्रसिद्ध फिल्मों में अभिनय किया।

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निभाए हिंदी सिनेमा के कई यादगार किरदार

बता दें कि जसराज का हिंदी सिनेमा में अहम योगदान रहा। उन्होंने 1950 से 60 के दशक में पर्दे पर कई ऐसे किरदार निभाए जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं। अमर सिंह राठौर, पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप जैसे दिग्गज किरदारों को निभाकर उन्होंने जीवंत किया।

बतौर नायक उनकी आखिरी फिल्म 'खूनी कौन, मुजरिम कौन' 1965 में आई थी। उन्होंने साल 2000 में दुनिया को अलविदा कह दिया था। साल 1980 में पी जयराज को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

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