'मुझे घुटन होती है...' चंद्रमुखी चौटाला की छवि क्यों तोड़ना चाहती हैं कविता कौशिक? बताई असली वजह
अभिनेत्री कविता कौशिक अपनी चंद्रमुखी चौटाला की छवि से बाहर निकलकर चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि टीवी पर 30-35 साल की अभिनेत ...और पढ़ें


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प्रियंका सिंह, मुंबई। टीवी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री कविता कौशिक अपने किरदारों को लेकर उतनी ही सजग हैं, जितनी करियर की शुरुआत में थीं।
धारावाहिक एफ.आई.आर में चंद्रमुखी चौटाला जैसी यादगार भूमिका निभाने के बाद वह अब स्टीरियोटाइप छवि से बाहर निकलकर कुछ नया करना चाहती हैं। उनका मानना है कि टीवी पर 30-35 साल की महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण किरदारों की कमी है।
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मुझे सबकुछ टीवी ने दिया है - कविता
अमेजन एमएक्स प्लेयर की वेब सीरीज कप्तान में पुलिस अफसर की भूमिका निभाने वाली कविता कहती हैं कि मेरे लिए आज भी रोल मायने रखता है। जैसी मेरी पर्सनैलिटी है, क्या वाकई लगता है कि मेरे लिए कोई रोल टीवी पर बचा है? अगर होगा,तो जरूर करना चाहूंगी। ना मैं सास लगती हूं, ना आदर्श बहू। मेरे लिए वह रोल्स हैं नहीं। मुझे सब कुछ टीवी ने दिया है, मैं राजस्थान से इस बड़े शहर काम करने ही आई थी। जिसकी कल्पना की थी, वह सब टीवी ने दिया है।

इतनी ख्याति इतना प्यार, ऐसे दर्शक दिए हैं, जो आजतक इतना प्यार करते हैं। मैं टीवी पर काम करना चाहती हूं, लेकिन 30-35 साल की महिलाओं के लिए रोल ही नहीं हैं। (हंसते हुए) वहां सीधे सास बना देते हैं कि बहू की जिंदगी में जहर मिलाइए। इन किरदारों में लोग मुझे की गंभीरता से नहीं लेंगे। एफ.आई.आर धारावाहिक के बाद अब कप्तान में एक बार फिर पुलिस अफसर के रोल में नजर आएंगी।
कैसे रोल करना है पसंद?
कविता कहती हैं कि यही कारण था कि इस शो के लिए मैंने हां कहा। मैं अपने पति से कई बार कहती थी कि मुझे ऐसा रोल करना है, जैसा फिल्मों में विलेन करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ होता ही नहीं है, ऐसे रोल शायद भविष्य में मिले। इस शो में वह मौका मिला। आज भी मैं बाहर जाती हूं, तो लोग चंद्रमुखी चौटाला कहकर ही बुलाते हैं, मैं खुश होती हूं। यह रोल मेरे बाकी कामों पर भारी पड़ जाता है, जबकि मैंने कई पंजाबी फिल्में भी की हैं।
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मना करने पर टूटा कविता का दिल
मेरे लिए थोड़ा घुटन वाली बात हो गई थी, चंद्रमुखी चौटाला वाली छवि को तोड़ना था। अगर ऐसा नहीं करती, तो स्टीरियोटाइप हो जाती। पिछले 20 साल में पुलिस के कई रोल आफर हुए हैं, भले ही एक ही सीन क्यों न हो। कई बार दिल भी टूटता है, क्योंकि ना कहना पड़ता है। यह शो भी जब आया था, तो लगा था कि ना ही कहूंगी। खैर, जब रोल के बारे में बताया, तो लगा करना ही है, फिर भले ही पैसे न मिलें।