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फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर तैयार, 6 सितंबर को पेरिस में महंत स्वामी महाराज करेंगे प्राण-प्रतिष्ठा

Published: Tue, 25 Aug 2026 03:11 PM (IST)

पेरिस में फ्रांस का पहला पारंपरिक बी.ए.पी.एस. स्वामिनारायण हिंदू मंदिर बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण 6 सितंबर को महंत स्वामी महाराज करेंगे।

फ्रांस में बना पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर

फ्रांस में बना पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर

HighLights

  1. पेरिस में फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर तैयार।

  2. 6 सितंबर को महंत स्वामी महाराज करेंगे प्राण-प्रतिष्ठा।

  3. 2 से 14 सितंबर तक 13-दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव।

डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। कला, स्थापत्य, साहित्य और भव्य स्मारकों के लिए विश्वविख्यात नगर पेरिस में नव रचित बी.ए.पी.एस. स्वामिनारायण हिन्दू मंदिर, फ्रांस का सर्वप्रथम परंपरागत हिन्दू मंदिर है।

मध्य-पूर्वी पेरिस के बुसी-सेंट-जॉर्जेस में निर्मित यह मंदिर भारतीय स्थापत्य कला और फ्रेंच इंजीनियरिंग के सुंदर समन्वय का प्रतीक है।

बुसी-सेंट-जॉर्जेस में विभिन्न धर्मों के उपासना-स्थलों को समाहित करने वाले Esplanade des Religions et des Cultures नामक क्षेत्र में यह मंदिर स्थित है ।

2017 में पेरिस में महंत स्वामी महाराज की उपस्थिति में आयोजित सभा में बुसी-सेंट-जॉर्जेस के महापौर यान ड्यूबॉस्क द्वारा मंदिर हेतु भूमि आवंटन की घोषणा की गई थी। इसके पश्चात बी.ए.पी.एस. के वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में 2021 में भूमिपूजन विधि और 2022 में शिलान्यास विधि संपन्न हुई थी।

मंदिर की डिजाइन बी.ए.पी.एस. द्वारा परंपरागत हिन्दू मंदिर स्थापत्य के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई है, जिसे फ्रांस के इंजीनियरिंग, पर्यावरण और निर्माण मानकों के अनुरूप साकार करने हेतु प्रसिद्ध फ्रेंच स्थापत्य संस्था Arte Charpentier को नियुक्त किया गया था।

इस मंदिर निर्माण में Arte Charpentier के साथ Bateg (VINCI Construction की सहायक कंपनी) और GS Construction (इंटीरियर फिनिशिंग) भी सम्मिलित हैं।

उल्लेखनीय है कि 13 जुलाई, 2023 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी ने पेरिस में बी.ए.पी.एस. संस्था के प्रतिनिधियों तथा Arte Charpentier के आर्किटेक्ट्स से भेंट की थी। इस भेंट के समय मंदिर निर्माण की योजना और मंदिर का 3D मॉडल प्रस्तुत किया गया था।

अप्रैल 2024 में, महंत स्वामी महाराज ने मंदिर के अंतिम नक्शों पर एक फ्रेंच शब्द लिखकर आशीर्वाद दिया। 2024 में औपचारिक रूप से निर्माण-कार्य आरंभ किया गया। नींव-स्तंभन कार्य विशेष रूप से 4 जून 2024 को आरंभ हुआ और उसी वर्ष बाद में भारत में प्रथम पत्थर की पूजनविधि सम्पन्न हुई।

जनवरी 2026 में भारत में गढ़े गए पत्थरों का प्रथम कंटेनर पेरिस पहुंचा। इस मंदिर के निर्माण में भारतीय शिल्पकारों और फ्रेंच इंजीनियरों के साथ प्रख्यात नोत्र-दाम कैथेड्रल के पुनर्स्थापन कार्य से जुड़ी फ्रेंच संस्था H Chevalier के विशेषज्ञ भी सम्मिलित हैं।

मंदिर की स्थापत्य झलक

प्राचीन भारतीय वास्तु कला से लेकर आधुनिकतम तकनीक के उपयोग से निर्मित इस मंदिर का सृजन अपनी विविधता और कला-कौशल के कारण विश्व में अजोड़ है।

भारत के कुशल शिल्पकारों द्वारा हाथों से गढ़े गए 1,000 से अधिक पत्थर और काष्ठ के टुकड़ों में सूक्ष्म और सुंदर शिल्पांकन किया गया है। प्रत्येक भाग को अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार कर, कोड नंबर देकर फ्रांस में असेंबलिंग के लिए भेजा गया था।

मंदिर का विस्तार: 5,000 वर्ग मीटर (53,800 वर्ग फुट)। 5 शिखर, 10 घुम्मट, 20 गढ़े गए स्तंभ, 120 झरोखे, 49 चरित्र शिल्प पैनल, 4 सुसज्जित छत्री।

यह मंदिर उपासना स्थल के साथ साथ अंतर-सांस्कृतिक संवाद, शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें प्रदर्शन कक्ष, क्लासरूम, सभागृह, सेमिनार हॉल, स्पोर्ट्स हॉल, अल्पाहारगृह और गिफ्ट शॉप जैसी सुविधाएँ होंगी।

इसके अतिरिक्त पर्यावरण-रक्षा एवं सस्टेनेबिलिटी के अनुरूप सुविधाओं में — वर्षा जल संचयन प्रणाली, LED सेंसर लाइटिंग, छत पर उद्यान और अंडरफ्लोर हीटिंग सम्मिलित हैं।

मंदिर के निर्माण में मुख्यतः ग्रीस के थासोस संगमरमर का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त भारत के अंबाजी संगमरमर तथा वियतनाम और इटली से प्राप्त संगमरमर का भी उपयोग किया गया है।

मंदिर में ग्वालियर के बलुआ पत्थर का भी उपयोग किया गया है। पत्थरों से निर्मित इस परंपरागत शिखरबद्ध मंदिर में ईंटों का उपयोग नहीं किया गया है। मंदिर का संरचनात्मक ढांचा फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग पद्धतियों के अनुसार कंक्रीट का उपयोग करके तैयार किया गया है।

फेस्टिवल ऑफ कल्चर: 2 सितंबर से 14 सितंबर

मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर 13-दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव — 'फेस्टिवल ऑफ़ कल्चर' — मनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत श्रद्धा, सेवा और बंधुत्व के मूल्यों को दृढ़ करने वाले अनेक रोचक कार्यक्रम और सामुदायिक आयोजन होंगे। इस महोत्सव की सेवा में 3,000 स्वयंसेवक जुटे हैं। इस महोत्सव में सम्मिलित होने हेतु 42 देशों से श्रद्धालु-भाविक पधारेंगे।

इस महोत्सव के मुख्य आकर्षण:

  • 2 से 14 सितंबर — वैदिक महायज्ञ
  • 2 सितंबर — महिलाओं द्वारा पालखी यात्रा
  • 3 सितंबर — पेरिस की सेन नदी पर 11 सुसज्जित नौकाओं के साथ जल यात्रा यह जल यात्रा 1997 में प्रमुख स्वामी महाराज की सेन नदी पर हुई नौका-यात्रा का स्मरण कराती है।
  • 5 सितंबर — नगरयात्रा: पेरिस के जगविख्यात सीमाचिह्नों के निकट से 14 सुसज्जित रथों में सांस्कृतिक शोभायात्रा
  • 6 सितंबर — मूर्तिप्रतिष्ठा और लोकार्पण
  • 14 सितंबर — हिन्दू सांस्कृतिक उत्सव

उल्लेखनीय है कि 1970 में पेरिस में एक संक्षिप्त पड़ाव के दौरान, बी.ए.पी.एस. के गुरु योगीजी महाराज ने फ्रांस में सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना की थी।

1982 में एफिल टावर के निकट एकत्रित एक छोटे समूह के साथ पेरिस में बी.ए.पी.एस. की प्रथम सत्संग सभा हुई थी। प्रमुख स्वामी महाराज के संकल्प और महंत स्वामी महाराज के आशीर्वाद से बना यह मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य, कला, आध्यात्मिक विरासत और सेवा का विरल स्थान है।

कोविड-19 महामारी के दौरान पेरिस में बी.ए.पी.एस. के स्वयंसेवक वरिष्ठ नागरिकों, ज़रूरतमंदों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को भोजन, आवश्यक सामग्री प्रदान करने की सेवा में जुड़े थे।

फ्रेंच गृह मंत्रालय के निमंत्रण पर, बी.ए.पी.एस. के स्वयंसेवकों ने पेरिस ओलंपिक के दौरान ओलंपिक विलेज में हिन्दू फेथ सेंटर के माध्यम से सेवा दी थी।

इसके अतिरिक्त, पेरिस के स्वयंसेवकों ने यूके, अमेरिका और यूरोप के अन्य भागों से आए बी.ए.पी.एस. स्वयंसेवकों के दल के साथ मिलकर यूक्रेन के संकट में सेवा दी, पोलैंड के रजेशोव नगर में प्रतिदिन लगभग 1,000 गरम शाकाहारी भोजन शरणार्थियों को उपलब्ध कराए।

महंत स्वामी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से बी.ए.पी.एस. संस्था के संत और स्वयंसेवक इस मंदिर महोत्सव की तैयारियों में अविरत सेवायज्ञ कर रहे हैं।

अंतर्धर्म संवादिता को प्रोत्साहन देने वाला और विविधता, सर्वसमावेशकता तथा पारस्परिक सहअस्तित्व के सीमाचिह्न स्वरूप यह मंदिर पेरिस के लिए एक अनुपम उपहार बनेगा।

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