गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: तलाकशुदा महिला को मिला विधवा का दर्जा, बच्चों को भी संपत्ति का हक
गुजरात उच्च न्यायालय ने पति की मौत के बाद एक तलाकशुदा महिला को विधवा का दर्जा दिया, उसके छह बच्चों को भी पिता की संपत्ति का वारिस माना। ...और पढ़ें

गुजरात उच्च न्यायालय ने तलाकशुदा महिला को विधवा का दर्जा दिया

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डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने 4 वर्ष पहले हुए तलाक के एक मामले पर सुनवाई करते हुए सामाजिक परंपराओं का हवाला देते हुए पति की मौत के बाद महिला को उसकी विधवा का दर्जा देने का फैसला सुनाया, याचिकाकर्ता व उसके 6 बच्चे अब पिता की संपत्ती के भी वारिस माने गये हैं।
गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष ईसाई समुदाय की एक महिला ने अगस्त 2025 में एक याचिका प्रस्तुत कर बताया कि वर्ष 1976 में उसका विवाह हुआ था और उनके छह बच्चे हैं।
पति ने वर्ष 2020 में पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी लगाई जिसका उसने विरोध नहीं किया था और पति से अलग रहने चली गई थी। पारिवारिक न्यायालय ने सितंबर 2022 में पत्नी का पक्ष सुने बिना सितंबर 2022 में तलाक को मंजूरी दे दी थी।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश आई जे वोरा तथा न्यायाधीश आई टी वाच्छानी के समक्ष याचिकाकर्ता ने बताया कि फरवरी 2024 में पति का निधन हो गया इसलिए उसे सामाजिक परंपरा का निर्वाह करने तथा अपने 6 बच्चों के कानूनी अधिकार के लिए विधवा का दर्जा प्रदान किया जाए।
न्यायालय ने पारिवारिक न्यायालय के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि समाजमें अकेली महिला का जीवन कठोर होता है तथा उसे सामाजिक परंपरा निभाने का अधिकार है।
साथ में कोर्ट ने यह भी माना कि फैमिली कोर्ट ने अपने फैसले में महिला के पक्ष को नहीं देखा, तथ्यों एवं परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने महिला के पत्नी होने के अधिकार को मान्यता देते हुए पारिवारिक कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए महिला को विधवा का दर्जा देने के साथ उनके 6 बच्चों को संपत्ती का अधिकारी माना।