'पति की मौत के बाद बेटी-दामाद ने हड़पे ₹15 लाख, 6 नाबालिग बच्चों की कस्टडी चाहिए'; गुजरात HC में महिला की याचिका
गुजरात के कच्छ में एक मां अपनी बेटी और दामाद से अपने ही छह नाबालिग बच्चों की कस्टडी मांग रही है।

बेटी-दामाद से अपने ही 6 बच्चों की कस्टडी मांग रही मां (AI जेनरेटेड फोटो)
HighLights
मां ने बेटी-दामाद से 6 बच्चों की कस्टडी मांगी।
गुजरात हाई कोर्ट ने बेटी-दामाद को नोटिस जारी किया।
मां ने बेटी पर बैंक खातों से पैसे निकालने का आरोप लगाया।
डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात के कच्छ से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मां अपनी ही बेटी और दामाद से अपने छह नाबालिग बच्चों की कस्टडी की मांग कर रही है।
महिला ने बच्चों की कस्टडी पाने के लिए गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। हाई कोर्ट ने सबसे बड़ी बेटी (22), दामाद और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर 8 सितंबर तक जवाब मांगा है।
बेटी-दामाद से अपने बच्चों की कस्टडी मांग रही मां
महिला के वकील ए.ए. जबुआवाला ने 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की है। इससे पहले इस साल की शुरुआत में मुंद्रा की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें कस्टडी देने से इनकार कर दिया था।
हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका के मुताबिक, मुंद्रा तालुका के ध्राब गांव की रहने वाली इस महिला की पहली शादी से एक बेटी है और दूसरी शादी से छह बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे और चार बेटियां हैं।
याचिका में बताया गया है कि महिला की सबसे बड़ी बेटी ने 2023 में घर से भागकर अपने बॉयफ्रेंड से शादी कर ली थी, जिससे उनके रिश्ते खराब हो गए थे।
इसमें आगे कहा गया है कि 6 जून, 2025 को महिला के दूसरे पति की मौत के बाद बेटी ने अपनी मां से सुलह कर ली और उन्हें अपने और अपने पति के साथ रहने के लिए बुलाया, लेकिन कुछ ही महीनों में रिश्ते फिर खराब हो गए।
मां ने बेटी-दामाद पर धोखाधड़ी का लगाया आरोप
याचिका में मां ने बेटी-दामाद पर पैसों के हेरफेर का आरोप लगाया गया है। महिला ने याचिका में बताया है, 'पति की मौत के बाद याचिकाकर्ता (मां) के भरोसे और कमजोर हालत का गलत फायदा उठाते हुए, प्रतिवादी नंबर 7 (बेटी) ने धोखे से याचिकाकर्ता के बैंक खातों पर कब्जा कर लिया।
महिला ने याचिका में बताया, 'याचिकाकर्ता की बेटी ने उनकी बिना मर्जी और जानकारी के, खातों में जमा पूरी रकम (लगभग 15,00,000 रुपये) निकाल ली और उसका गलत इस्तेमाल किया।'
महिला का दावा है कि बाद में वह अपनी बेटी का घर छोड़कर चली गई, लेकिन उसे अपने छह बच्चों को साथ ले जाने की इजाजत नहीं दी गई। उसने आरोप लगाया है कि उसकी बेटी और दामाद ने बच्चों को वापस करने से इनकार कर दिया।
बच्चों पर किसका हक?
याचिका में बताए गए कोर्ट रिकॉर्ड से पता चलता है कि दिसंबर 2025 में यह मामला मुंद्रा की JMFC कोर्ट गया। वहां CrPC की धारा 97 के तहत कस्टडी और सर्च वारंट जारी करने की मांग की थी, लेकिन इस साल जनवरी में यह अर्जी खारिज कर दी गई।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पाया कि बच्चों को जबरदस्ती रोककर नहीं रखा जा रहा था। कोर्ट ने दर्ज किया कि जब बच्चों को पेश किया गया, तो उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे अपनी मर्जी से अपनी बहन के साथ रह रहे हैं।
हाई कोर्ट में महिला के वकील ने दलील दी है कि वह बच्ची की स्वाभाविक अभिभावक है और कस्टडी पाने की हकदार है। साथ ही, उन्होंने मुंद्रा कोर्ट के निष्कर्ष को भी चुनौती दी है और कहा है कि सबसे छोटी बच्ची तीन साल की है, इसलिए वह यह ठीक से नहीं बता सकती थी कि वह कहाँ रहना चाहती है।
