गुजरात पुलिस का बड़ा फैसला: आरोपियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने पर रोक, DGP ने जारी किए सख्त निर्देश
गुजरात पुलिस ने आरोपियों के साथ सार्वजनिक अपमान और अमानवीय व्यवहार पर सख्त रोक लगा दी है। डीजीपी डॉ. के.एल.एन. राव ने नई गाइडलाइन जारी कर पुलिसकर्मियो ...और पढ़ें
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गुजरात के पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. के.एल.एन. राव

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। गुजरात पुलिस ने आरोपियों के साथ सार्वजनिक अपमान और अमानवीय व्यवहार पर सख्त रुख अपनाया है। गुजरात के पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. के.एल.एन. राव ने एक नई गाइडलाइन जारी कर पुलिसकर्मियों को आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने, बेइज्जत करने और मारपीट करने जैसी प्रथाओं पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
डीजीपी ने कहा कि आरोपियों को सड़कों पर परेड कराना या भीड़ के सामने पेश करना जैसी घटनाओं से गुजरात पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचा है और पेशेवर जांच कार्यों पर अमानवीय व्यवहार की तस्वीरें हावी हो गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में इस तरह की 'स्ट्रीट जस्टिस' अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
'मुर्गा' बनाना, उठक-बैठक पर रोक
नई गाइडलाइन के मुताबिक, गिरफ्तारी से लेकर जांच पूरी होने तक आरोपी की गरिमा और आत्मसम्मान बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी होगी।
निर्देशों में पुलिसकर्मियों को आरोपियों से उठक-बैठक करवाने, घुटनों के बल चलाने, सार्वजनिक रूप से पीटने, कान पकड़वाने, माफी मंगवाने या 'मुर्गा' बनाने जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने को कहा गया है।
BNSS के नियमों का पालन अनिवार्य
डीजीपी का यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के प्रावधानों के अनुरूप बताया गया है। इसमें कहा गया है कि जहां तत्काल गिरफ्तारी जरूरी न हो, वहां नोटिस जारी किया जाए। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए नाम-पट्टिका (नेम टैग) लगाना भी अनिवार्य होगा।
हथकड़ी लगाने के नियम भी सख्त
निर्देशों में BNSS की धारा 43 के तहत हथकड़ी के इस्तेमाल को भी सीमित किया गया है। अब केवल आदतन अपराधियों या आतंकवाद, दुष्कर्म, मानव तस्करी और संगठित अपराध जैसे गंभीर मामलों में ही हथकड़ी लगाने की अनुमति होगी।
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अन्य मामलों में आरोपी को हथकड़ी लगाने या सार्वजनिक रूप से पेश करने के दौरान किसी प्रकार की रोक-टोक के लिए मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
वरिष्ठ अधिकारियों की होगी जवाबदेही
यह निर्देश घटनास्थल के पुनर्निर्माण, मेडिकल जांच और आरोपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने की प्रक्रिया पर भी लागू होंगे। डीजीपी ने साफ किया है कि यदि इन निर्देशों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित DySP, ACP, SP या पुलिस कमिश्नर को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।