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गुजरात: 2018 के दुष्कर्म और हत्या मामले में बरी हुआ था आरोपी, अब फिर से रेप-मर्डर के आरोप में गिरफ्तार

Published: Fri, 28 Aug 2026 06:15 PM (IST)

राजकोट में 2018 के रेप-मर्डर केस में बरी हुए आरोपी को 76 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में फिर गिरफ्तार किया गया है।

गुजरात में रेप-मर्डर के आरोप में बरी हुआ आरोपी दोबारा गिरफ्तार

गुजरात में रेप-मर्डर के आरोप में बरी हुआ आरोपी दोबारा गिरफ्तार

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डिजिटल डेस्क, राजकोट। गुजरात के राजकोट में 2018 के एक बहुचर्चित रेप और मर्डर केस में मौत की सजा से हाल ही में बरी हुए आरोपी को पुलिस ने 76 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ रेप और हत्या के आरोप में दोबारा गिरफ्तार कर लिया है।

राजकोट-अहमदाबाद हाईवे पर सत हनुमान मंदिर के पास भीख मांगने वाली बुजुर्ग महिला 19 अगस्त 2026 की शाम से अचानक लापता हो गई थी। जब परिजन उसकी तलाश में असफल रहे, तो महिला के पोते ने 20 अगस्त को कुवाडवा रोड पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

डैम के किनारे मिली लाश

21 अगस्त को राजकोट-भावनगर हाईवे पर अजी डैम के किनारे मोगल माताजी मंदिर के पास महिला की लाश बरामद हुई। शुरुआत में अजी डैम पुलिस ने इसे हादसा मानते हुए शव को फोरेंसिक पोस्टमार्टम के लिए भेजा था।

बाद में अखबारों में छपी जानकारी के आधार पर जब महिला की पहचान हुई, इसके बाद पुलिस ने जांच तेज की।

रेप के बाद की हत्या

जोन 1 के इंचार्ज DCP राकेश देसाई के अनुसार, सत हनुमान मंदिर से अजी डैम तक 13 किलोमीटर के रास्ते पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने पर आरोपी की पहचान हुई। फुटेज से खुलासा हुआ कि आरोपी रमेश वैधुकिया ने महिला को घर छोड़ने का झांसा देकर अपने ऑटो रिक्शा में बैठाया था।

आरोप है कि वह उसे अलग-अलग जगहों पर ले गया, डंडे से जमकर पीटा और सुनसान जगह पर रेप करने के बाद डंडे से मारकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने शव को कपड़े में लपेटा और अजी डैम के पास फेंक दिया।

दुष्कर्म और हत्या के मामले में हुआ था बरी

आरोपी रमेश वैधुकिया का लंबा और संगीन आपराधिक इतिहास रहा है। साल 2010 में उस पर चोटिला पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या करने और लाश कुएं में फेंकने का मामला दर्ज हुआ था।

साल 2018 में थोराला पुलिस स्टेशन में उस पर तीन साल की बच्ची के अपहरण, रेप और मर्डर का केस दर्ज किया गया। इसी मामले में मार्च 2020 में ट्रायल कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, गुजरात हाई कोर्ट ने फरवरी 2026 में उसे बर कर दिया था।

हाई कोर्ट ने तब पाया था कि अभियोजन पक्ष का मामला पूरी तरह से परिस्थितियों से जुड़े सबूतों पर आधारित था, जिसमें घटनाओं की कड़ी अधूरी थी और CCTV फुटेज, DNA रिपोर्ट व रिकंस्ट्रक्शन पंचनामे में गंभीर कमियां थीं, जिसके आधार पर उसे संदेह का लाभ मिला था। बरी होने के कुछ ही महीनों बाद उसने इस नई वारदात को अंजाम दे दिया।