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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    'गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगाने से किसान-व्यापारियों को नुकसान', बोले हरियाणा व्यापार मंडल के अध्यक्ष

    By Jagran NewsEdited By: Rajat Mourya
    Updated: Sun, 23 Jul 2023 10:48 PM (IST)

    हरियाणा व्यापार मंडल के अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार द्वारा धान की खरीद एक अक्टूबर से शुरू होने के कारण किसानों को अपनी फसल को खुले बाजार में पह ...और पढ़ें

    'गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगाने से किसान-व्यापारियों को नुकसान', बोले हरियाणा व्यापार मंडल के अध्यक्ष
    'गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगाने से किसान-व्यापारियों को नुकसान', बोले हरियाणा व्यापार मंडल के अध्यक्ष

    चंडीगढ़, राज्य ब्यूरो। अखिल भारतीय व्यापार मंडल के मुख्य महासचिव व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने राइस मिलर, आढ़ती व किसानों से बातचीत करने के उपरांत कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगाने का फरमान जारी करना किसान व व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने वाला आदेश है, जो कि निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्यात पर रोक लगाने से किसान व व्यापारियों को काफी नुकसान होगा।

    बजरंग गर्ग ने कहा कि केंद्र सरकार को तुरंत प्रभाव से गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक को हटाना चाहिए। गैर बासमती चावल श्रीलंका, इटली, थाइलैंड, स्पेन, नेपाल, चीन, अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका देशों में भारत के व्यापारी सप्लाई करते हैं जबकि हर बार सरकार द्वारा धान की खरीद लेट शुरू होती है, जिसमें प्रति एकड़ धान खरीद पर कैप लगा दी जाती है और बार-बार सरकारी खरीद एजेंसियां धान में नमी बताकर किसानों को धान खरीदने में तंग करते हैं।

    'किसान बर्बादी की कगार पर हैं'

    बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार द्वारा धान की खरीद एक अक्टूबर से शुरू होने के कारण किसानों को अपनी फसल को खुले बाजार में पहले बेचनी पड़ती है। व्यापारी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल बेचने के उद्देश्य से किसानों की धान की खरीद कर उसका चावल निकालकर विदेशों में बेचता है, जिस कारण किसानों को अपनी सफल के उचित दाम मिल जाते हैं। चावल पर निर्यात बंद होने से खुले बाजार में किसानों की धान कोई ना खरीदने से हरियाणा, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश राज्यों के किसानों को बड़ा भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जबकि सरकार की गलत नीतियों से देश व प्रदेश का किसान बर्बादी की कगार पर हैं।

    बजरंग गर्ग ने कहा कि इसी प्रकार 2008 में यूपीए सरकार ने भी गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगाने का काम किया था। उस समय तो भारतीय जनता पार्टी ने निर्यात पर रोक लगाने का भारी विरोध किया था। आज वही भाजपा सरकार को चावला निर्यात पर रोक लगाकर किसान व व्यापारियों के साथ धोखा कर रही है।

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    गर्ग ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को किसान व व्यापारियों के हित में गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक को हटाने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत कर समस्या का समाधान करवाना चाहिए। 2008 में यूपीए सरकार ने निर्यात पर जब रोक लगाई थी उस समय हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने केंद्र सरकार से बातचीत करके उस रोक को हटाने का काम किया था।