बचपन में देखा था पिता को वर्दी में, अब खुद लेफ्टिनेंट बन गांव लौटी सिमरनजीत; स्वागत के लिए उमड़ी भीड़
लेफ्टिनेंट सिमरनजीत कौर सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर पहली बार अपने पैतृक गांव सिरसगढ़ लौटीं, जहां ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। उनके पिता, दादा और भाई भी सेना में हैं।

लेफ्टिनेंट सिमरनजीत कौर का सिरसगढ़ में भव्य स्वागत, बनीं प्रेरणास्रोत।
HighLights
लेफ्टिनेंट सिमरनजीत कौर का पैतृक गांव सिरसगढ़ में भव्य स्वागत।
सैन्य परिवार की तीसरी पीढ़ी में शामिल होकर बढ़ाया गांव का मान।
युवाओं और बेटियों को कड़ी मेहनत व लगन का दिया संदेश।
संवाद सहयोगी, मुलाना। सिरसगढ़ की गलियां सोमवार को ढोल की थाप और फूलों की खुशबू से गूंज उठीं। गांव की बेटी सिमरनजीत कौर सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पहली बार लेफ्टिनेंट की वर्दी में अपने पैतृक गांव पहुंचीं तो ग्रामीणों ने पलक-पांवड़े बिछाकर उनका स्वागत किया।
सिरसगढ़ स्कूल के पास धर्मकांटा से गांव तक ग्रामीण फूल-मालाएं लेकर ढोल-बाजों के साथ उनके स्वागत में उमड़ पड़े। यह सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं थी, बल्कि पूरे गांव के लिए गौरव का क्षण था।
लेफ्टिनेंट की वर्दी में सिमरनजीत को देखकर ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा था। गांव की बेटी की इस उपलब्धि पर हर कोई खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था। स्वागत के बाद सिमरनजीत कौर परिवार के साथ दोसड़का स्थित बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह गुरुद्वारा साहिब पहुंचीं।
उन्होंने गुरुद्वारा साहिब में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। इस दौरान गुरुद्वारा के बाबा जसवीर सिंह खालसा ने उन्हें सिरोपा पहनाकर सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
घर में बचपन से देखी वर्दी, बेटी ने हासिल किया मुकाम
सिमरनजीत कौर के लिए सेना की वर्दी कोई नई पहचान नहीं है। बचपन से ही उन्होंने घर में सैन्य अनुशासन और देशसेवा का माहौल देखा। उनके पिता कैप्टन अरविंदर सिंह 193 मेड रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हैं। दादा गनर गुरदयाल सिंह 13 फील्ड रेजिमेंट में सेवाएं दे चुके हैं, जबकि भाई अंशदीप सिंह वर्तमान में 18 सिख रेजिमेंट में देश की सेवा कर रहे हैं। उनकी मां सुखविंदर कौर पूर्व शिक्षिका हैं।
पिता को सैन्य वर्दी में देखकर बचपन में ही सिमरनजीत के मन में सेना में जाने की इच्छा पैदा हुई। समय के साथ यही इच्छा उनका लक्ष्य बनी और कड़ी मेहनत व अनुशासन के बल पर उन्होंने इसे हकीकत में बदल दिया। अब परिवार की सैन्य परंपरा तीसरी पीढ़ी में सिमरनजीत कौर तक पहुंच गई है।
बीसीए-एमसीए के बाद चुनी सैन्य सेवा की राह
सिमरनजीत ने प्रारंभिक शिक्षा बराड़ा के एंजल पब्लिक स्कूल से हासिल की। इसके बाद अंबाला छावनी के एसडी कालेज से बीसीए किया। कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमसीए की डिग्री हासिल की।
तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने सेना में जाने का निर्णय लिया। सीडीएस के माध्यम से चयनित होने के बाद उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और अब लेफ्टिनेंट के रूप में देशसेवा की नई जिम्मेदारी संभाली है।
बेटियों और युवाओं को दिया मेहनत का संदेश
गांव पहुंचने पर सिमरनजीत कौर ने विद्यार्थियों और युवाओं से अपने लक्ष्य को हमेशा ऊंचा रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए मेहनत के साथ लगन और अनुशासन जरूरी है। परिवार से मिली प्रेरणा और सही मार्गदर्शन ने उनके सफर को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उपलब्धि गांव की उन बेटियों के लिए भी प्रेरणा बनी है, जो पढ़ाई के साथ अपने लिए बड़े सपने देख रही हैं।
