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रेलवे में डेपुटेशन पर आएंगे वन-राजस्व अधिकारी, जमीन-मंजूरी की रुकावटें हटेंगी

By Deepak BehalEdited By: Prince Sharma
Published: Wed, 09 Sep 2026 09:00 AM (IST)

रेलवे बोर्ड ने निर्माण परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए नई नीति लागू की है, जिसके तहत अब वन और राजस्व अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाएगा।

रेलव में डेपुटेशन पर आएंगे वन-राजस्व अधिकारी (फाइल फोटो)

रेलव में डेपुटेशन पर आएंगे वन-राजस्व अधिकारी (फाइल फोटो)

HighLights

  1. वन और राजस्व अधिकारी अब रेलवे में प्रतिनियुक्ति पर

  2. जमीन अधिग्रहण और वन मंजूरी की बाधाएं होंगी दूर

  3. परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए नई नीति लागू

दीपक बहल, अंबाला। रेलवे की निर्माण परियोजनाओं में होने वाली देरी पर अब रेलवे बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया है। नई रेल लाइन, पुल, ऊपरी पुल और अन्य बड़ी परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण, वन मंजूरी और बिजली-पानी जैसी सुविधाओं को स्थानांतरित करने में होने वाली देरी दूर करने के लिए रेलवे के निर्माण संगठनों में व्यापक बदलाव किया गया है।

रेलवे बोर्ड ने निर्माण संगठनों के लिए नई नीति लागू की है। इसके तहत अब रेलवे में केवल अपने अधिकारियों पर निर्भर रहने के बजाय वन, राजस्व और उपयोगिता विभागों के अधिकारियों को भी प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे में वरिष्ठ प्रशासनिक श्रेणी या कनिष्ठ प्रशासनिक श्रेणी स्तर के एक भारतीय वन सेवा अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाएगा।

यह अधिकारी वन मंजूरी से जुड़े मामलों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर तेजी से निपटाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे उन परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से वन मंजूरी के कारण अटकी हुई हैं।

जमीन अधिग्रहण के लिए राजस्व अधिकारियों की मदद: परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी बड़ी बाधा बनती है। इसे दूर करने के लिए क्षेत्रीय रेलवे में राज्य के राजस्व विभाग और बिजली, पानी तथा दूरसंचार जैसी उपयोगिता सेवाओं से जुड़े अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाया जाएगा।

पांच साल का कार्यकाल, बेहतर काम पर सात साल तक विस्तार

दो साल का अंतराल जरूरी निर्माण संगठन में दोबारा तैनाती पाने के लिए अधिकारी को कम से कम दो वर्ष का अंतराल पूरा करना होगा। इससे एक ही अधिकारी की लगातार तैनाती पर रोक लगेगी और अधिक अधिकारियों को निर्माण परियोजनाओं में काम करने का अवसर मिलेगा।

तैनाती से पहले अधिकारियों को गति शक्ति विश्वविद्यालय या केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में दो से तीन सप्ताह का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।

प्रशिक्षण में परियोजना प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कवच सुरक्षा प्रणाली, भवन सूचना प्रतिरूप, डिजिटल प्रतिरूप, तीव्र गति से रेल पटरी निर्माण, सुरंग, पुल और भूमि अधिग्रहण जैसे विषय शामिल होंगे।

परियोजनाओं में अधिकारियों की निरंतरता बनाए रखने के लिए निर्माण संगठन में सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित किया गया है। बेहतर प्रदर्शन की स्थिति में इसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

पांच वर्ष से कम समय से कार्यरत मौजूदा अधिकारियों के कार्यकाल की भी समीक्षा होगी। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, गैर-कार्यात्मक उच्च प्रशासनिक श्रेणी और वरिष्ठ प्रशासनिक श्रेणी के अधिकारियों के तबादले का अधिकार रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के पास रहेगा।

अधिकारियों से मांगे गए तीन क्षेत्रीय रेलवे विकल्प

वहीं कनिष्ठ प्रशासनिक श्रेणी और उससे नीचे के अधिकारियों के तबादले संबंधित बोर्ड सदस्य की मंजूरी से होंगे। निर्माण संगठन में पांच वर्ष का सफल कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारियों से उनकी पसंद के तीन क्षेत्रीय रेलवे के विकल्प मांगे जाएंगे।

इसके आधार पर उन्हें प्राथमिकता के साथ पसंद के क्षेत्र में तैनाती देने का प्रयास किया जाएगा। नई नीति से न केवल निर्माण कार्य की गति बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि अधिकारियों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा के जरिए देरी की जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।