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चॉक-डस्टर के साथ नया अवतार... हरियाणा के मास्टरजी बनेंगे सुपर डिजिटल गुरु, SCERT ने तैयार किया मास्टर प्लान  

Published: Sun, 27 Sep 2026 06:00 AM (IST)

हरियाणा के सरकारी प्राइमरी शिक्षकों को अब एआई आधारित शिक्षण तकनीक में दक्ष 'सुपर डिजिटल शिक्षक' बनाने की तैयारी है। ...और पढ़ें

हरियाणा के मास्टरजी बनेंगे सुपर डिजिटल गुरु। फाइल फोटो

हरियाणा के मास्टरजी बनेंगे सुपर डिजिटल गुरु। फाइल फोटो

HighLights

  1. सरकारी शिक्षकों को एआई आधारित शिक्षण तकनीक में दक्ष किया जाएगा।

  2. एससीईआरटी ने 'सुपर डिजिटल शिक्षक' बनाने का मास्टर प्लान तैयार किया।

  3. एआई से हर बच्चे के सीखने के स्तर के अनुसार पढ़ाई होगी।

सुरेश मेहरा, भिवानी। ब्लैक बोर्ड पर चाक से लिखते मास्टर जी और सामने बैठे बच्चों की कतार... सरकारी स्कूल की यह पारंपरिक तस्वीर अब बदलने वाली है। आने वाले दिनों में मास्टर जी चाक के साथ एआई का प्रयोग भी करेंगे। हरियाणा के सरकारी प्राइमरी शिक्षकों को अब सिर्फ विषय पढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें एआइ आधारित शिक्षण तकनीक में दक्ष सुपर डिजिटल शिक्षक बनाने की तैयारी है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीइआरटी) ने इसके लिए मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत शिक्षकों को एआई-एकीकृत शिक्षण शास्त्र की आनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। खास बात यह होगी कि एआइ का इस्तेमाल केवल सामग्री तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर बच्चे के सीखने के स्तर के अनुसार पढ़ाई को ढालने पर जोर होगा।

अपने मन मुताबिक सीख सकेंगे विद्यार्थी

कक्षा में सभी बच्चे एक जैसी गति से नहीं सीखते। कोई कहानी से जल्दी समझता है तो कोई चित्र देखकर। किसी बच्चे को अतिरिक्त अभ्यास की जरूरत होती है तो कोई कठिन सवाल भी आसानी से हल कर लेता है। ऐसे में शिक्षक एआइ टूल्स की मदद से बच्चों के स्तर के मुताबिक अलग-अलग वर्कशीट, लेसन प्लान, कहानियां, फ्लैश कार्ड और अभ्यास सामग्री तैयार कर सकेंगे।

अभी ऐसी सामग्री तैयार करने में शिक्षक का काफी समय लगता है। एआइ इस काम को मिनटों में पूरा कर सकेगा। इससे शिक्षक का समय सामग्री बनाने के बजाय बच्चे की समझ, उसकी कमजोरी और सीखने की प्रगति पर लगाने में अधिक इस्तेमाल हो सकेगा।

25 सितंबर से पंजीकरण, 30 अक्टूबर तक प्रशिक्षण

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी विनय जिंदल कहते हैं 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक पंजीकरण चलेगा। इसके बाद 30 अक्टूबर तक आनलाइन प्रशिक्षण चलेगा होगा। ट्रेनिंग का एक अहम हिस्सा छोटे बच्चों के साथ एआइ के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर रहेगा।

बच्चों की निजता, डिजिटल सुरक्षा, एआइ से मिली जानकारी की जांच और तकनीक के नैतिक इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को भी शिक्षकों को समझाया जाएगा। प्रशिक्षण को जमीन पर उतारने के लिए हर जिले की डाइट और खंड स्तर के एआइ समन्वयकों को जिम्मेदारी दी गई है। वे शिक्षकों को पंजीकरण, प्रशिक्षण पूरा करने और प्रमाणपत्र प्राप्त करने तक तकनीकी सहायता देंगे।

एआइ आधुनिक युग का अहम टूल है। इसके सही प्रयोग की सही समझ होना जरूरी है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह टूल बहुत कारगर साबित हो सकता है। एससीइआरटी की यह अच्छी पहल कही जा सकती है। शिक्षक इसमें दिलचस्पी लें और फिर बच्चों तक ज्ञान को पहुंचाएं तो ही इसके अच्छे परिणाम आ पाएंगे।

- डॉ. दलीप सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस, एआई एक्सपर्ट एवं मनोवैज्ञानिक।