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गड्ढों से मिलेगी मिनटों में राहत! फरीदाबाद की ‘Pothole Ambulance’ का देशभर में डंका, अब अपनाएंगे दूसरे राज्य

Published: Wed, 09 Sep 2026 05:25 AM (IST)

फरीदाबाद का 'पाटहोल एंबुलेंस' मॉडल सड़कों के गड्ढे भरने में देशभर में छाया है। इस पहल को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. फरीदाबाद का पाटहोल एंबुलेंस मॉडल देशभर में प्रसिद्ध हुआ।

  2. पर्यावरण मंत्रालय ने अन्य राज्यों को इसे अपनाने का सुझाव दिया।

  3. शिकायत के 24 घंटे में गड्ढे भरने का समाधान होता है।

दीपक पांडेय, फरीदाबाद। जिन सड़क के गड्ढों को रिपेयर करवाने के लिए लोगों को निगम मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। एसडीओ और जेई से बार बार कहना पड़ता था। अब केवल एक वाट्सएप मैसेज और एप पर शिकायत देने के बाद वह गड्ढे रिपेयर हो जाते हैं।

फरीदाबाद नगर निगम ने लोगों की इस मुश्किल को पाटहोल एंबुलेंस के जरिए दूर किया है। पाटहोल एबुलेंस कुछ ही मिनटों में सड़क के गड्ढे को भर देती है।

नेशनल एयर क्लीन प्रोग्राम के तहत हुए सर्वेक्षण में इसका परिणाम भी सामने आया है। जिसमें फरीदाबाद ने पिछले तीन साल में 33 अंकों की छलांग लगाते हुए पूरे देश में 14वां स्थान हासिल किया। अब सड़कों के गड्ढों को भरने का फरीदाबाद फार्मूला पूरे देशभर में छा गया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय से इसको दूसरे राज्यों को भी अपनाने का सुझाव दिया गया है।

हवा को साफ रखने वाले सबसे बेहतरीन उपायों को जारी की है बुकलेट

सीपीसीबी और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का परिणाम जारी होने के बाद बुकलेट जारी की है। बुकलेट में उन सबसे बेहतरीन उपाय को बताया गया है। जिन्होंने हवा को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन उपायों में फरीदाबाद की पाटहोल एंबुलेंस को भी शामिल किया गया है। जिसकी मदद से कुछ ही मिनटों को गड्ढों को भरने का काम किया जाता है। इसके लिए निजी एजेंसी को निगम ने ठेका दिया गया है। एजेंसी की गाड़ी 24 घंटे रेडीमेड पेच वर्क करने की सामग्री रखती है।

एजेंसी के वाट्सएप नंबर 9871699494 पर मैसेज आते ही गड्ढे को रिपेयर करने के लिए एंबुलेंस पहुंच जाती है। इसके साथ ही लोग म्यारी सड़क एप पर भी शिकायत कर सकते हैं। खास बात है कि किसी भी शिकायत का समाधान 24 घंटे के भीतर ही करना होता है।

एक साल पहले 2.5 करोड़ की लागत से शुरू की गई थी योजना

एक साल पहले 2.5 करोड़ रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था। गुरुग्राम की एजेंसी को इसका ठेका दिया गया था। निगम का दावा है कि अभी तक एक हजार से अधिक गड्ढों को भरा जा चुका है। दिल्ली में हुई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण की बैठक में भी इस माडल को सराहना मिल चुकी है।

नंबर गेम

  • 14वां स्थान स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में हासिल किया
  • 01 साल पहले शुरू किया गया था प्रोजेक्ट
  • 2.5 करोड़ किए गए खर्च
  • 1000 से अधिक गड्ढे अभी तक हो चुके हैं रिपेयर
  • 24 घंटे के भीतर करना होता है समाधान

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लगातार दो साल से पाटहोल एंबुलेंस जिले में काम कर रही है। रेडीमेड सामग्री के जरिए गड्ढों को भरने में कुछ मिनट ही लगते हैं। पर्यावरण मंत्रालय ने भी इसको सराहते हुए अपनी बुकलेट में जगह दी है। इसके साथ ही दूसरे राज्यों को इसे अपनाने की सुझाव दिया है।

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नितिन कादियान, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम