फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में 30% शिक्षक पद खाली, पढ़ाई और बोर्ड रिजल्ट पर पड़ रहा असर
फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षा की गुणवत्ता और दाखिला प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले ...और पढ़ें

शिक्षकों के 30 प्रतिशत पद रिक्त। (AI Generated Image)
निभा रजक, फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी है, जिसका शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम पर सीधा असर दिखाई दे रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट में यह सामने आया है।
अध्यापकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालात तो यह हैं कि जिले ग्रामीण हिस्सों में मौजूद सरकारी स्कूलों में हिंदी, गणित, विज्ञान और इंग्लिश जैसे विषयों को पढ़ाने वाले अध्यापकों की कमी है। इसका असर दाखिला प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है।
वर्तमान में केवल 3600 शिक्षक
फरीदाबाद और बल्लभगढ़ ब्लाक में राजकीय प्राथमिक, उच्च, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक 378 सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में अध्यापकों के 30 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वर्तमान में केवल 3,600 अध्यापक ही पढ़ा रहे हैं। कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां सिर्फ एक या दो अध्यापक ही तैनात हैं, ऐसे में मुख्य अध्यापकों के लिए व्यवस्था को बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
अध्यापकों की कमी के कारण दाखिला प्रक्रिया में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। बीते शैक्षणिक सत्र की बात करें तो बाल वाटिका से लेकर बारहवीं तक के विद्यार्थियों की संख्या 1.25 लाख थी। लेकिन इस वर्ष अभी तक सिर्फ 87 हजार विद्यार्थियों ने ही स्कूलों में दाखिला लिया है। वहीं 50 ऐसे स्कूलों की भी पहचान की गई है, जहां एक भी नए दाखिले इस वर्ष नहीं हुए हैं।
विज्ञान और नवाचार का भी नहीं मिल पा रहा ज्ञान....
नीति आयोग की रिपोर्ट विभिन्न माध्यमिक आंकड़ों जैसे यू-डीआईएसई 2024-25, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, एनएएस 2017 और 2021 पर आधारित है। फरवरी 2025 में आयोग की ओर से आयोजित गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया गया है।
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जिसमें प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी चिंताजनक बताई गई है। शहर की बात करें तो कई स्कूल ऐसे हैैं जहां विज्ञान जैसे अहम विषय तक के शिक्षक नहीं है। जिससे विद्यार्थियों को नवाचार का ज्ञान नहीं मिल पा रहा है।
बोर्ड परीक्षाओं परिणाम
| वर्ष | पास प्रतिशत |
|---|---|
| 2025 | 91.63% |
| 2024 | 93.38% |
| 2023 | 67.89% |
| 2022 | 84.59% |
| 2021 | 100% (कोरोना काल) |
| 2020 | 81.61% |
| 2019 | 67.86% |
| 2018 | 57.38% |
| 2017 | 47.85% |
कई ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में विज्ञान, गणित व अंग्रेजी जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी बनी है। इससे बोर्ड और वार्षिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों से ड्यूटी हटाने के बाद स्थिति में सुधार होगा।
विजय मुद्गिल, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
जिले के सरकारी स्कूलों में करीब एक हजार पद रिक्त हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में दो-तीन शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी से समस्या और अधिक बढ़ गई है। सरकार सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए दावे तो कर रही है, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर है। हालात में पिछले पांच वर्षों से कोई सुधार नहीं हो रहा है। मंच शिक्षकों की कमी का मुद्दा कई बार उठा चुका है।
कैलाश शर्मा, प्रदेश महासचिव, अभिभावक एकता मंच।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के संबंध में विभाग को जानकारी है। विभाग ने इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है। व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पढ़ाई का बेहतर माहौल मिल सके। स्कूलों में विद्यार्थियों को सभी जरूरी सुविधाएं प्रदान की जा रही है। दाखिला अभी अगस्त और सितंबर तक चलेंगे, जिसके बाद विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है।
डॉ. मनोज मित्तल, उप जिला शिक्षा अधिकारी।