इंदौर में गंदे पानी से हुईं मौतों से फरीदाबाद नगर निगम ने लिया सबक, स्वच्छ जल की दिशा में उठाया अहम कदम
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद फरीदाबाद नगर निगम सतर्क हो गया है। मुख्य अभियंता ने 46 वार्डों में पानी की गुणवत्ता जांचने और रिकॉर्ड रखने के ...और पढ़ें

HighLights
इंदौर घटना के बाद फरीदाबाद निगम पानी जांच को सतर्क
46 वार्डों में पानी की गुणवत्ता जांचने के आदेश जारी
सीवर-पानी लाइनें पास होने से दूषित जल की समस्या
दीपक पांडेय, फरीदाबाद। इंदौर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत और उसके बाद अधिकारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज को देखते हुए पानी आपूर्ति को लेकर नगर निगम भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है। चीफ इंजीनियर की ओर से 46 वार्डाेंं में पानी टेस्टिंग करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इसके साथ ही पानी की टेस्टिंग का रिकार्ड भी रखने को कहा गया है। कई काॅलोनियों में पानी और सीवर लाइन एक साथ डाली गई है। अपने शहर में कुछ जगहों पर ड्रेन के ऊपर से पानी की लाइन गुजर रही है।
ऐसे में ड्रेन का पानी वर्षा के दौरान ओवरफ्लो होता हैं तो भी लोगों तक गंदा पानी पहुंचता है। निगम में ही हर सप्ताह दूषित पानी को लेकर 10 से 12 शिकायतें आती है। चीफ इंजीनियर की ओर से यह भी कहा गया कि पानी की टेस्टिंग कराने के दौरान यह भी देखा जाए कि उसमें कौन कौन से हानिकारक तत्व अधिक मात्रा में हैं।
शहर में पानी को सप्लाई को लेकर दो विभाग संभालते जिम्मेदारी
शहर में पानी को लेकर दो विभाग जिम्मेदारी संभालते हैं। एक विभाग के चेयरमैन तो खुद मुख्यमंत्री हैं। यमुना किनारे लगे रेनीवेल से पानी फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण द्वारा नगर निगम के बूस्टर में सप्लाई किया जाता है।
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इसके बाद बूस्टर से पानी डोर टू डोर लोगों के घरों तक पहुंचता है। दूषित पानी को लेकर कई बार पार्षदों की ओर से इंजीनियरिंग ब्रांच के अधिकारियों को भी शिकायत दी जाती है। दूषित पानी की सबसे अधिक समस्या बल्लभगढ़ और एनआइटी विधानसभा क्षेत्र में होती है।
निगम के अधीन गांवों में लगाए गए है ट्यूबवेल
शहर में 24 गांव करीब तीन साल पहले नगर निगम में शामिल हो गए थे। इन गांवों में अभी तक रेनीवेल की लाइन तो नहीं डाली गई है, लेकिन निगम की ओर से ट्यूबवेल लगाया गया है। इन ट्यूबबेल के माध्यम से ही लोगों को पानी प्राप्त होता है। आदेश में इन ट्यूबवेल से भी पानी के सैंपल लेने के लिए कहा गया है।
ऑडिट में पानी की गुणवत्ता भी पाई गई खराब
इससे पहले प्रदेश सरकार की ओर से कराए गए वाटर ऑडिट में भी पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई थी। सभी 100 प्रतिशत नमूने भी फेल पाए गए हैं। पानी के 74 स्त्रोतों में टीडीएस, फ्लोराइड, क्लोराइड, सल्फेट्स भी तय मानक से कही अधिक पाए गए। इसके साथ ही छह स्त्रोत में आर्सेनिक की मात्रा काफी अधिक पाई गई। एक स्त्रोत में यूरेनियम भी पाया गया।
कई बार सीवरेज लीकेज होने के कारण पानी गंदा आ जाता है। लेकिन शिकायत मिलते ही लीकेज को ठीक करवा दिया जाता है। वहीं अगर गंदा पानी सप्लाई भी होता है तो प्रत्येक काॅलोनी का अलग-अलग ग्रुप बना हुआ है। उस पर मैसेज डालकर प्रयोग नहीं करने के लिए कहां जाता है।
-शीतल खटाना, वार्ड-पांच पार्षद
केवल कार्यकारी अभियंता को ही नहीं बल्कि जेई को भी अलग-अलग ट्यूबवेल और रेनीवेल से सप्लाई होने वाले पानी के सैंपल लेने के लिए कहा गया है। तीन से चार दिन के भीतर सभी को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। पानी की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है।
-ओमवीर सिंह, अधीक्षण अभियंता