SC का आदेश और केंद्र सरकार ने दी मंजूरी, अरावली वन भूमि के बदले दोगुनी जमीन देगा HSVP; 57 करोड़ का भुगतान
एचएसवीपी अरावली वन क्षेत्र में 67 एकड़ भूमि के बदले वन विभाग को दोगुनी जमीन देगा, जिसके लिए 57 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया है। केंद्र सरकार ने व ...और पढ़ें
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अरावली वन क्षेत्र में आ रहा एचएसवीपी द्वारा किया गया निर्माण। जागरण
HighLights
एचएसवीपी 67 एकड़ वन भूमि के बदले दोगुनी जमीन देगा।
वन विभाग को 57 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
केंद्र से वन भूमि डायवर्जन को सैद्धांतिक मंजूरी मिली।
निभा रजक, फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में करीब 67 एकड़ में आ रहे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के जिमखाना क्लब और ग्रुप हाउसिंग सोसायटी सहित अन्य निर्माण के बदले वन विभाग को दोगुनी जमीन दी जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 के तहत वन भूमि के डायवर्जन के लिए प्रिंसिपल अप्रूवल दे दी गई है। अब अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। एचएसवीपी की ओर से 57 करोड़ रुपये का भुगतान भी वन विभाग को भुगतान किया गया है।
अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अरावली वन क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी है। इसकी जद में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा कराए गए निर्माण भी आ रहे थे। वन विभाग ने इसकी रिपोर्ट तैयार करके उच्च अधिकारियों को भेजा था। एचएसवीपी को वन क्षेत्र में बने होटल और रिजार्ट खाली करने या उसके बदले दूसरी जमीन उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे।
एचएसवीपी ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में आवेदन कर दिया था। कंजर्वेशन एक्ट के तहत इस जमीन के बदले कोई दूसरी जमीन वन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। इसको प्रिंसीपल अप्रूवल मिल गई है।

विकसित किया जाएगा घना वन क्षेत्र
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एचएसवीपी की ओर से लेजर वैली पार्क में वन विभाग को जमीन देने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें घना वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आस-पास के रिहायशी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा। अंतिम मंजूरी के बाद डायवर्जन होगा। इसके साथ ही वन विभाग की ओर से तहसील को भी डायवर्जन के लिए लिख दिया गया है।
अवैध निर्माण के खिलाफ दो महीने तक हुई थी कार्रवाई
बीते वर्ष जून और जुलाई में हुई कार्रवाई में अवैध निर्माण रूप से बने फार्म हाउस, बैंक्वेट हाल और मैरिज गार्डन पर कार्रवाई की गई थी। वन विभाग को करीब 240 निर्माणों को तोड़कर लगभग 261 एकड़ जमीन खाली कराई गई थी।
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अनंगपुर गांव के लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए। मामला कोर्ट में होने के कारण फिलहाल कार्रवाई पर रोक लगी है, लेकिन विभाग की ओर से दोबारा निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले वन विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2021 में अवैध रूप से बसी खोरी कॉलोनी के पांच हजार से अधिक मकानों पर कार्रवाई की गई थी।
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एचएसवीपी के निर्माण वन क्षेत्र में आ रहे हैं। ऐसे में वन विभाग को एचएसवीपी की ओर 67 के बदले दोगुनी जमीन दी जाएगी। इसमें हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से पौधे लगाए जाएंगे। अभी तक लेजर वैली में जमीन मिलने पर बात हुई है। तहसील को भी डायवर्जन के लिए लिख दिया गया है। कोर्ट और उच्च अधिकारियों के आदेशानुसार आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी। - झलकार उयाके, वन मंडल अधिकारी