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फरीदाबाद में हुआ कुश्ती का महासंग्राम, ईरानी पहलवान को चित कर कलुआ गुर्जर ने जीती 2.5 लाख की कुश्ती

Updated: Sun, 16 Aug 2026 02:37 PM (IST)

हरियाली तीज पर तिगांव में पहली बार दो अखाड़ों में दंगल का आयोजन हुआ, जिसमें कलुआ गुर्जर ने ईरानी पहलवान इरफान को हराकर ढाई लाख की कुश्ती जीती।

तिगांव के स्टेडियम में ढाई लाख की कुश्ती के लिए भिड़ते हुए बाएं ईरानी पहलवान इरफान और कलुआ गुर्जर। सौ. पंचायत

तिगांव के स्टेडियम में ढाई लाख की कुश्ती के लिए भिड़ते हुए बाएं ईरानी पहलवान इरफान और कलुआ गुर्जर। सौ. पंचायत

HighLights

  1. कलुआ गुर्जर ने ईरानी पहलवान इरफान को हराया।

  2. हरियाली तीज पर तिगांव में पहली बार दो अखाड़े सजे।

  3. राज्य मंत्री राजेश नागर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

जागरण संवाददाता, (तिगांव) फरीदाबाद। हरियाली तीज के अवसर पर तिगांव में पहली बार दो जगह अखाड़ा सजाया गया। तिगांव ग्राम पंचायत द्वारा अनाज मंडी और तिगांव अधाना ग्राम पंचायत द्वारा स्टेडियम में कुश्तियां कराई गईं। स्टेडियम में हुए दंगल में बड़ी कुश्ती ढाई लाख की हुई।

ईरानी पहलवान इरफान और कलुआ गुर्जर के बीच खूब जोर अजमाइश हुई। आखिर में कलुआ गुर्जर ने बाजी मार ली। दूसरी ढाई लाख की कुश्ती अजय गुर्जर और मोनू के बीच बराबरी पर रही। उधर, अनाज मंडी में ढाई लाख की कुश्ती पुष्पेंद्र मलिक व शेरा गुर्जर के बीच हुई।

इसमें शेरा गुर्जर ने बाजी मार ली। बाकी दोनों जगह 51 हजार, 31 हजार, 21 और 11 हजार की अनेक कुश्तियां कराई गई थी। दोनों जगह प्रदेश के राज्य मंत्री राजेश नागर मुख्य अतिथि रहे। दोनों ग्राम पंचायत के सरपंच विक्रम प्रताप सिंह और वेद प्रकाश अधाना संयोजक रहे।

दांव-पेच से घटती-बढ़ती रही तालियां

विभिन्न आयु वर्ग के पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपने दमखम और कुश्ती के पारंपरिक दांव-पेंच का प्रदर्शन किया। मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और पहलवानों का उत्साह बढ़ाया। पहलवानों ने प्रतिद्वंद्वी को चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।

अखाड़े में जैसे ही कोई पहलवान अपने प्रतिद्वंद्वी पर भारी पड़ता, दर्शक तालियों और जयकारों से उसका उत्साह बढ़ाते नजर आए। कुश्ती के दौरान पहलवानों ने पकड़, पलटा, धोबी पछाड़ और अन्य पारंपरिक दांव-पेंच आजमाए। कई मुकाबले बेहद रोमांचक रहे और अंतिम क्षण तक दर्शकों की नजर अखाड़े पर टिकी रही।

दंगल में मौजूद बुजुर्ग महेंद्र, सुरेश ने भी कुश्ती की पुरानी परंपरा को याद करते हुए कहा कि पहले गांवों में तीज और अन्य पर्वों पर कुश्ती दंगल प्रमुख आकर्षण हुआ करते थे। आज भी इस परंपरा को जीवित रखना हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने जैसा है।

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