यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Faridabad News: मिनी फारेस्ट बचाने के लिए सामने आए बच्चे और बुजुर्ग, पेड़ों से चिपककर कर रहे विरोध
एफएमडीए द्वारा बनाई जा रही सड़क फुटपाथ व साइकिल ट्रैक के बीच में आने वाले सैकड़ों पेड़ों को काटा जा रहा है। इससे शहर की हरियाली पर असर पड़ रहा है। साथ ही ऐसे लोग दुखी हैं जो आसपास के सेक्टर में रह रहे हैं।

फरीदाबाद [प्रवीन कौशिक]। एफएमडीए द्वारा बनाई जा रही सड़क, फुटपाथ व साइकिल ट्रैक के बीच में आने वाले सैकड़ों पेड़ों को काटा जा रहा है। इससे शहर की हरियाली पर असर पड़ रहा है। साथ ही ऐसे लोग दुखी हैं जो आसपास के सेक्टर में रह रहे हैं। उन्हें इन पेड़ों की कीमत भली-भांति पता है।

रविवार को सेक्टर-15 स्थित लेबर चौक पर बच्चों ने एफएमडीए द्वारा की जा रही पेड़ों की कटाई का विरोध किया। विरोध का तरीका भी कुछ अलग था। छोटे बच्चे पेड़ों से चिपक गए और उनका मिनी फारेस्ट न उजाड़ने की मांग करते रहे।
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बच्चों ने विकसित किया मिनी फारेस्ट
दरअसल, यहां सेक्टर-15 में रहने वाले बच्चों ने मिनी फारेस्ट विकसित किया हुआ है। इसके लिए बच्चों ने खूब मेहनत की थी। साल 2017 में कुछ स्कूली बच्चों ने ये कदम उठाया था। सेक्टर-15 स्थित लेबर चौक के पास खाली जमीन थी। इसलिए यहां मिनी फारेस्ट बनाने की सोची लेकिन मौके पर काफी कचरा पड़ा था।
बच्चों ने सारा कचरा उठवाया और साफ मिट्टी डलवाई। करीब डेढ़ साल में मिनी फारेस्ट तैयार हो सका। काफी पेड़ लगाए जो अब बड़े हो गए हैं। एक छोटा तालाब भी बनाया। इसके बाद बच्चे व पर्यावरण प्रेमी हर रविवार को छुट्टी वाले दिन यहां आते हैं।
मिनी फारेस्ट को बनाने में समर्थ, गौतम पुरी, रूसिल आर्य, रवि कश्यप, कुशाग्र, आशिमा का अहम सहयोग रहा है। बच्चों ने मांग की है कि यदि साइकिल ट्रैक बनाना है तो मिनी फारेस्ट से बाहर बनाया जाए। विरोध को देखते हुए फिलहाल एफएमडीए ने पेड़ नहीं काटा।
इसलिए काटे जा रहे पेड़
बता दें, एफएमडीए इस समय वाईएमसीए, कोर्ट रोड, सेक्टर-15ए-16ए और मेट्रो अस्पताल के सामने वाली सड़कें बना रहा है। वाईएमसीए को छोड़कर बाकी सड़कों पर फुटपाथ व साइकिल ट्रैक बनाने का काम चल रहा है। जिसके लिए किनारे पर हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे हैं। एफएमडीए के कार्यकारी अभियंता जगदीश कुमार ने बताया कि रोड किनारे और जगह ही नहीं है। इसलिए कुछ पेड़ों को काटना पड़ रहा है ताकि आमजन को सुविधाएं दी जा सके।

