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    10 अगस्त को फतेहाबाद में 'जेल भरो आंदोलन', किरढ़ान में किसान-मजदूरों ने बनाई रणनीति; MSP की कानूनी गारंटी की मांग

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 01:14 PM (IST)

    किरढ़ान गांव में किसान-मजदूरों की बैठक हुई, जिसमें 10 अगस्त को फतेहाबाद में होने वाले 'जेल भरो आंदोलन' की रणनीति तैयार की गई। ...और पढ़ें

    10 अगस्त को फतेहाबाद में 'जेल भरो आंदोलन' (फोटो: जागरण)

    10 अगस्त को फतेहाबाद में 'जेल भरो आंदोलन' (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. 10 अगस्त को फतेहाबाद में 'जेल भरो आंदोलन' की रणनीति बनी।

    2. मुक्त व्यापार समझौते, एमएसपी गारंटी, कर्जमुक्ति जैसी प्रमुख मांगें उठाईं।

    3. अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू, खेत मजदूर यूनियन ने की बैठक।

    जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू और खेत मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे जनसम्पर्क अभियान के तहत आज एक टीम गांव किरढ़ान के आंबेडकर भवन पहुंची।

    यहां आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य 10 अगस्त को आयोजित होने वाले ''जेल भरो आंदोलन'' की तैयारियों को धार देना और ग्रामीणों को इससे जोड़ना था।

    बैठक में वक्ताओं ने लंबित मांगों को लेकर सरकार के रवैये पर कड़ा रोष जताया तथा 10 अगस्त को फतेहाबाद की सब्जी मंडी में एकत्र होकर उपायुक्त कार्यालय तक विशाल रोष प्रदर्शन करने व गिरफ्तारियां देने का आह्वान किया। इस अवसर पर मनीष गोरखपुरिया, सुनील कुमार, रामदास, सुमन, शारदा और विक्रम सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।

    अमेरिका से मुक्त व्यापार समझौते का विरोध

    बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला प्रधान विष्णुदत्त शर्मा ने केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने अमेरिका के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौते का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह देश की खेती-किसानी, पशुधन और रोजगार को तबाह कर देगा, इसलिए इसे तुरंत रद्द किया जाए।

    इसके अलावा उन्होंने बिजली के निजीकरण व स्मार्ट मीटर योजना पर रोक लगाने और किसानों-मजदूरों को पूरी तरह कर्ज मुक्त करने की मांग उठाई।

    किसानों और मजदूरों की प्रमुख मांगे

    विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि 10 अगस्त के प्रदर्शन के माध्यम से सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग की जाएगी। साथ ही बाढ़, जलभराव व सेम से बर्बाद हुई फसलों का बकाया बीमा क्लेम व मुआवजा तुरंत जारी करने और सेम की समस्या का स्थायी समाधान निकालने का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

    इसके अलावा मनरेगा के तहत 200 दिन का काम व 700 रुपये दिहाड़ी तय करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और न्यूनतम मासिक वेतन 30,000 रुपये लागू करने की मांग की जाएगी। अंत में ग्रामीणों ने आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

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