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गुरुग्राम में मानसून की तैयारी अधूरी, जलभराव में डूबेंगी सड़कें; कौन से विभाग हैं जिम्मेदार?

Published: Wed, 24 Jun 2026 12:25 PM (GMT+05:30)

गुरुग्राम में मानसून से पहले नालों की सफाई अधूरी है, जिससे शहर में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ...और पढ़ें

सेक्टर-10ए स्थित हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक जाने वाली मुख्य सड़क किनारे बनी ड्रेन कचरे और गंदगी से अटी पड़ी है। वर्षा के दौरान पानी निकासी ठप होने से सड़कें तालाब बन जाती है। जागरण

सेक्टर-10ए स्थित हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक जाने वाली मुख्य सड़क किनारे बनी ड्रेन कचरे और गंदगी से अटी पड़ी है। वर्षा के दौरान पानी निकासी ठप होने से सड़कें तालाब बन जाती है। जागरण

HighLights

  1. मानसून से पहले गुरुग्राम में नालों की सफाई अधूरी

  2. 155 जलभराव हॉटस्पॉट में से 85 पर काम जारी

  3. अवैध सीवर कनेक्शन और अतिक्रमण जलभराव के कारण

संदीप रतन, गुरुग्राम। मानसून सीजन में सरकारी महकमों की लापरवाही का खामियाजा शहर के बाशिंदों को भुगतना पड़ रहा है। अभी मानसून की आने में एक सप्ताह बाकी है। हालांकि जीएमडीए और नगर निगम द्वारा नालों की सफाई के कार्य चल रहे हैं, लेकिन अभी भी सभी नाले साफ कर लिए जाएंगे।

विभाग दावे कर रहे हैं कि 30 जून से पहले नालों की सफाई कर ली जाएगी, लेकिन दिल्ली-जयपुर हाईवे सहित शहर के अन्य नालों में गाद और कचरा भरा हुआ है। वर्ष 2023 में भी मानसून की तेज वर्षा के दौरान स्कूलों और कंपनियों में एक दिन का अवकाश घोषित करना पड़ा था।

Gurugram News (7)

साइबर सिटी में मंगलवार हुई वर्षा के बाद जलमग्न हुई न्यू कॉलोनी की मुख्य सड़क। जागरण

70 स्थानों पर नालों का काम हुआ पूरा

इससे पहले गुरुग्राम में 29 जुलाई 2016 को तेज वर्षा के दौरान जलभराव होने के कारण गुरुग्राम में महाजाम लग गया था। हीरो होंडा चौक क्षेत्र में लोग रात भर भूखे प्यास ट्रैफिक जाम में फंसे रहे।

शहर में मुख्य तौर पर दिल्ली-जयपुर हाईवे पर नरसिंहपुर में, सेक्टर 15, ओल्ड दिल्ली रोड, राजीव चौक, बसई रोड, पटौदी रोड, उमंग भारद्वाज चौक, सेक्टर चार-सात, लक्ष्मण विहार, सेक्टर 38, 40, 45, 46, 47, 55, 56, सुशांत लोक सहित नए गुरुग्राम के कई क्षेत्रों में जलभराव होता है।

वर्ष जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील स्थान
2020 79
2021 39
2022 34
2023 31
2024 112
2025 159

जलभराव के 155 हॉटस्पॉट चिह्नित

प्रशासन द्वारा 155 कुल जलभराव के हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं। जिनमें नगर निगम द्वारा 70 स्थानों पर समाधान कार्य पूरा किया जा चुका है। 85 स्थानों पर कार्य प्रगति पर है। 41 अति संवेदनशील, 49 मध्यम और 65 जलभराव के छोटे हॉटस्पॉट हैं। नगर निगम के चीफ इंजीनियर विजय ढाका ने बताया कि एक सप्ताह में सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

कहीं नाला नहीं तो कहीं कनेक्शन अधूरे

उमंग भारद्वाज चौक से पटौदी रोड पर सड़क दुरुस्त नहीं है। इस सड़क के किनारे नाले का निर्माण नगर निगम कर रहा है। इस सड़क पर बरसाती नाला नहीं होने के कारण पिछले कई वर्षों से जलभराव हो रहा है।

स्थिति यह है कि मानसून की तेज वर्षा में इस सड़क पर कारों के टायर तक डूब जाते हैं। गाडौली गांव तक लंबा ट्रैफिक जाम लगता है। काफी जगहों पर छोटे नालों का बड़ी ड्रेन के साथ कनेक्शन ही नहीं जोड़े गए हैं। सेक्टर दस में एक नाले का कार्य लगभग डेढ़ साल से अधूरा है।

जीएमडीए कंट्रोल रूम करेगा का स्थापित

जीएमडीए के एक्सईएन विक्रम सिंह ने बताया कि मानसून के दौरान जलभराव की शिकायतों के निवारण और शहर को बाढ़ जैसी स्थिति से बचाने के लिए कंट्रोल रूम बनाने तथा पंप-मशीनरी जगह-जगह स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एक जुलाई से 15 सितंबर तक पूरे मानसून के दौरान मैनपावर, हाइड्रा और अर्थमूवर मशीन, ट्रैक्टर माउंटेड पंप सहित अन्य मशीनरी से काम लिया जाएगा।

जलभराव के ये हैं कारण

  1. नालों में कई जगहों पर सीवर कनेक्शन भी अवैध रूप से जोड़ दिए गए हैं।
  2. शहर में लगभग 950 दूध डेयरी है। नालों में डेयरियों का वेस्ट भी डाला जा रहा है।
  3. लेग एक और दो ड्रेन का कुछ हिस्सा नजफगढ़ नाले से जुड़ा नहीं होने के कारण जलभराव होता है।
  4. नालों पर अतिक्रमण होने के कारण जलनिकासी नहीं हो पाती है।
  5. शहर में आयुध डिपी के 900 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थित अवैध कालोनियों सहित अन्य अवैध कालोनियों के समीप से गुजर रहे नालों पर कब्जा हो चुका है। इससे नाले अवरुद्ध हो चुके हैं।

निगम के एक जोन-1 क्षेत्र की स्थिति

  • कुल 13 हॉटस्पॉट
  • 4 छोटे, 5 मध्यम, 4 अति संवेदनशील
  • 6 स्थानों पर कार्य पूरा
  • 7 स्थानों पर कार्य जारी
  • सेक्टर-10ए, गांधी नगर बूस्टर और बेगमपुर खटोला में कार्य पूर्ण
  • फाजिलपुर में डी-सिल्टिंग कार्य जारी

जोन-2 की स्थिति

  • 23 कुल हॉटस्पॉट
  • 4 छोटे, 13 मध्यम, 6 अति संवेदनशील
  • 10 स्थानों पर कार्य पूरा
  • 13 स्थानों पर कार्य जारी
  • ड्रेनेज सुधार, स्टार्म वाटर ड्रेन निर्माण और डी-सिल्टिंग जारी
  • 150 किलोमीटर कुल लंबाई के मुख्य बरसाती नाले हैं।
  • 550 किलोमीटर कुल लंबाई सरफेस ड्रेन की है।
  • 2600 किलाेमीटर लंबाई के आंतरिक बरसाती नाले बने हैं।
  • 55.22 कुल लंबाई लेग-1, लेग-2 और लेग-3 ड्रेन की है।
  • 311.60 वर्ग किलोमीटर निगम का क्षेत्र है।
  • 36 वार्ड निगम क्षेत्र में हैं।

यह विभाग हैं जिम्मेदार

गुरुग्राम में बरसाती नालों और ड्रेनेज सिस्टम की जिम्मेदारी कई विभागों में बंटी हुई है। इनमें नगर निगम गुरुग्राम, नगर निगम मानेसर, एचएसआइआइडीसी, जीएमडीए, एचएसवीपी और पीडब्ल्यूडी शामिल हैं।

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