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    दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर खुले नाले दे रहे हादसे को दावत, NHAI की लापरवाही से जान का खतरा

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 02:00 AM (GMT+05:30)

    एनएचएआई की लापरवाही से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर खुले नाले वाहन चालकों के लिए जानलेवा बन रहे हैं। मानसून में पानी भरने से हादसे का खतरा बढ़ जाता ...और पढ़ें

    दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर खुले नाले दे रहे हादसे को दावत।

    दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर खुले नाले दे रहे हादसे को दावत।

    HighLights

    1. दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर खुले नाले बने जानलेवा।

    2. एनएचएआई की लापरवाही से बढ़ रहा हादसों का खतरा।

    3. ट्रैफिक पुलिस ने एनएचएआई को कार्रवाई के लिए लिखा पत्र।

    विनय त्रिवेदी, गुरुग्राम। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर एनएचएआई की लापरवाही वाहन चालकों की जान पर भारी पड़ रही है। खेड़कीदौला से राजीव चौक तक करीब 10 किलोमीटर के इस स्ट्रेच पर सर्विस लेन के दोनों तरफ कई जगहों पर गहरे नाले बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के खुले पड़े हैं। न तो दीवार, न सुरक्षा ग्रिल और न ही जर्सी बैरिकेड। वर्षा के दौरान ये नाले वाहन चालकों के लिए काल बन सकते हैं।

    पिछले सप्ताह हुई तेज वर्षा के दौरान जब नालों में पानी भर गया था, तब कई कारें और बाइक अनजाने में इनमें जा गिरी थीं। गनीमत रही कि उस समय जनहानि नहीं हुई, लेकिन हर बार किस्मत साथ दे, यह जरूरी भी नहीं। स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि मानसून के दौरान हाईवे की सर्विस लेन पर हर बार पानी भर जाता है।

    पानी भरने के बाद सड़क और नाले में फर्क करना नामुमकिन हो जाता है। रात के समय में यह खतरा दोगुना हो जाता है। पहले इन नालों पर लोहे की सुरक्षा ग्रिल लगी हुई थी। एनएचएआई ने उन्हें हटा दिया। अब जगह-जगह दीवार और जर्सी बैरिकेड लगाने का काम चल रहा है, लेकिन वह भी कछुए की चाल से। ज्यादातर प्वाइंट्स पर आज भी कोई बैरिकेडिंग नहीं है। लोगों का आरोप है कि एनएचएआई हादसे का इंतजार कर रहा है।

    हर साल 450 से ज्यादा मौतें

    सड़क सुरक्षा के आंकड़े भी डराने वाले हैं। हर साल गुरुग्राम में साढ़े चार सौ से ज्यादा लोग सड़क हादसों में जान गंवा देते हैं। ट्रैफिक पुलिस के रिकार्ड के अनुसार इनमें आधे से ज्यादा मौतें हाईवे और एक्सप्रेसवे जैसे पर होती हैं। खुले नाले, अचानक कट, खराब लाइटिंग और लापरवाह निर्माण इन हादसों की मुख्य वजह हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक छोटी सी बैरिकेडिंग से दर्जनों जानें बचाई जा सकती हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा।

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    गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने पहले भी एनएचएआई को पत्र लिखकर खुले नालों को तुरंत बंद करने और बैरिकेडिंग करने की मांग की थी। अब ट्रैफिक पुलिस ने एक बार फिर एनएचएआई को रिमाइंडर भेजने का फैसला किया है। वाहन चालकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा। - सत्यपाल कुमार, एसीपी ट्रैफिक हाईवे व हेडक्वार्टर

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