10 साल में 64 प्रतिशत बढ़ा गुरुग्राम का शहरी विस्तार, 2030 तक और तेज होगी विकास की रफ्तार
गुरुग्राम का शहरी क्षेत्र दस वर्षों में 64% बढ़कर 168.20 वर्ग किलोमीटर हो गया है। जीएमडीए के जियोस्पेशियल अध्ययन के अनुसार, 2030 तक यह विस्तार और तेज ...और पढ़ें

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HighLights
गुरुग्राम का शहरी क्षेत्र दस वर्षों में 64% बढ़ा।
जीएमडीए ने जियोस्पेशियल अध्ययन से विकास पैटर्न समझा।
2030 तक प्रमुख कॉरिडोर पर तेजी से विस्तार होगा।
संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। गुरुग्राम का शहरी विस्तार पिछले एक दशक में तेज रफ्तार से बढ़ा है। शहर का विकसित क्षेत्र (बिल्ट-अप एरिया) वर्ष 2015 के 102.50 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2025 में 168.20 वर्ग किलोमीटर पहुंच गया है। यानी दस वर्षों में शहर का विकसित क्षेत्र करीब 64 प्रतिशत बढ़ा है।
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की ओर से कराए गए जियोस्पेशियल (जीआईएस) अध्ययन में यह सामने आया है। अध्ययन में यह भी अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2030 तक शहर का विस्तार प्रमुख विकास कारिडोर के आसपास और अधिक तेज़ी से होगा।
इसे देखते हुए सड़क, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज, सार्वजनिक परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं की समय रहते वैज्ञानिक योजना बनाना आवश्यक होगा।
डेटा आधारित स्मार्ट शहरी योजना
जीएमडीए ने यह अध्ययन शहर के तेजी से बदलते विकास स्वरूप को समझने और भविष्य की जरूरतों के अनुसार आधारभूत ढांचे की योजना तैयार करने के उद्देश्य से कराया है।
इसके जरिए सड़कों, स्टार्म वाटर ड्रेनेज, पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम समेत अन्य शहरी सुविधाओं के विस्तार का रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी. सी. मीणा ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों के लिए डेटा आधारित योजना समय की मांग है। जीआईएस अध्ययन से शहर के विकास के पैटर्न को समझने के साथ भविष्य में किस क्षेत्र में किस तरह की आधारभूत सुविधाओं की जरूरत होगी, इसका पहले से आकलन किया जा सकेगा।
इससे विकास परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और शहरीकरण की गति के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीएमडीए का लक्ष्य गुरुग्राम को बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक नागरिक सुविधाओं और टिकाऊ विकास वाला भविष्य के लिए तैयार शहर बनाना है।
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जीएमडीए के जीआईएस अनुभाग के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुल्तान सिंह ने बताया कि अध्ययन में उच्च गुणवत्ता वाली सैटेलाइट इमेजरी, जियोग्राफिक इन्फार्मेशन सिस्टम (जीआईएस), सांख्यिकीय विश्लेषण और आधुनिक मशीन लर्निंग माडल का उपयोग किया गया। अध्ययन के दौरान 92 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ शहर के शहरी विस्तार की मैपिंग की गई, जिससे भूमि उपयोग में हुए बदलावों का विश्वसनीय आकलन संभव हो सका।
मुख्य कॉरिडोर और नियोजित विकास
रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम का अधिकांश विकास द्वारका एक्सप्रेसवे, सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर), एनएच-48, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, सोहना रोड, न्यू गुरुग्राम, साइबर सिटी, उद्योग विहार और आईएमटी मानेसर जैसे प्रमुख परिवहन एवं विकास कारिडोर के आसपास हुआ है। रिपोर्ट में बेहतर सड़क संपर्क, आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी और नियोजित शहरी विकास को इस विस्तार की मुख्य वजह बताया गया है।
अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2030 तक इन विकास कारिडोर के आसपास शहरी विस्तार और तेज होगा। ऐसे में एकीकृत भूमि उपयोग योजना, टिकाऊ आधारभूत ढांचे का विकास, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा पर्यावरण और पारिस्थितिकी संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।
जीएमडीए का मानना है कि यह अध्ययन आने वाले वर्षों में गुरुग्राम के सुनियोजित विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
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जियोस्पेशियल तकनीक अब जीएमडीए के लिए शहरी नियोजन का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है। इसके जरिए भूमि उपयोग और आधारभूत ढांचे की जरूरतों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है। अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य की परियोजनाओं को प्राथमिकता देने और शहर के अनुमानित विस्तार के अनुरूप दीर्घकालिक विकास योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पीसी मीणा, सीईओ, जीएमडीए