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Explainer: गुरुग्राम में 550 करोड़ खर्च फिर भी जलभराव, बारिश आते ही क्यों डूब जाता है साइबर सिटी?

Published: Wed, 26 Aug 2026 08:02 AM (IST)

गुरुग्राम में ड्रेनेज सिस्टम पर 550 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद हर साल भारी जलभराव होता है, जिससे शहर ...और पढ़ें

गोल्फ कोर्स रोड पर जलभराव में बंद पड़ी सियाज कार। जागरण

गोल्फ कोर्स रोड पर जलभराव में बंद पड़ी सियाज कार। जागरण

HighLights

  1. ड्रेनेज पर 550 करोड़ खर्च, फिर भी गुरुग्राम में जलभराव।

  2. एजेंसियों में तालमेल की कमी, एकीकृत नेटवर्क का अभाव।

  3. 75 एमएम बारिश में सड़कें बनीं नदी, यातायात चरमराया।

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले गुरुग्राम के लोगों को हर साल वर्षा होने पर जलभराव का दंश झेलना पड़ता है।

हरियाणा की राजधानी बने इस शहर में अरबों के फ्लैट लेकर रहने वाले लोग दो कौड़ी के ड्रेनेज सिस्टम के आगे लाचार नजर आते हैं। वर्षा होने पर नदी बन चुकी सड़कों से उन्हें गुजरना पड़ता है।

कई लाख की कार पानी भरने से रास्ते में ही बंद हो जाती और वाहन छोड़ कमर तक भरे पानी ने उन्हें गुजरना पड़ता है। ऐसा तब हो रहा जब पांच साल में ड्रेनेज सिस्टम पर 550 करोड़ से ज्यादा रकम खर्च कर दी गई।

कागजी सफाई भी समस्या की एक बड़ी वजह

सोमवार को करीब 75 एमएम वर्षा ने एक बार फिर ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए।

मुख्यमंत्री नायब सिह सैनी से लेकर गुरुग्राम में रहने वाले प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह सांसद, विधायकों तथा अधिकारियों की ओर से जलभराव नहीं होने के दावे पानी के सैलाब में तैरते नजर आए।

यह समस्या यहां की पांच एजेंसियों के बीच तालमेल नहीं होने और इंटीग्रेटेड यानी एकीकृत नेटवर्क की कमी के चलते हो रही है। नालों की सफाई ठीक से नहीं करा कागजी सफाई भी समस्या की एक बड़ी वजह है।

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स्कूली बसें भी जलभराव में बंद हो गईं

सोमवार को हुई 75 एमएम वर्षा से सुभाष चौक, राजीव चौक, हीरो होंडा चौक, महावीर चौक, सोहना रोड, गोल्फ कोर्स रोड, मेदांता रोड अंडरपास और राजीव चौक एनएमटी अंडरपास समेत कई स्थानों पर जलभराव से यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

सैंकड़ों वाहन पानी में फंस गए। यहां तक की स्कूली बसें भी जलभराव में बंद हो गई थीं। बच्चों को गोदी में लेकर उनके अभिभावकों ने निकाला। कार बंद होने पर लोग लोगाें को ट्रैक्टर में बैठा नदी बन चुकी सड़कों से निकाला गया था।

जलनिकासी ढांचे पर कितना हुआ खर्च? 

यहीं हाल गोल्फ कोर्स रोड का भी था करोड़ों रुपये की संपत्तियां होने के बावजूद बुनियादी जलनिकासी व्यवस्था नहीं है। हालात देख मंगलवार को स्कूलों में आनलाइन कक्षा लगानी पड़ी, प्राइवेट संस्थानों में वर्क फ्राम हो कर दिया गया। पिछले वर्षों की अगर बात करें तो विभिन्न एजेंसियों की जलनिकासी ढांचे पर खर्च और चल रही परियोजनाओं की राशि 550 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है।

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सारी परियोजनाएं साबित हुईं असफल

जीएमडीए ने सेक्टर 76-80 में मास्टर स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के लिए करीब 119.31 करोड़ रुपये के काम चल रहे हैं। लेग-2 ड्रेन के 1.4 किलोमीटर हिस्से के पुनर्निर्माण पर करीब 20.2 करोड़ रुपये की परियोजना है।

वहीं, वाटिका चौक से एनएच-48 की ओर लेग-4 ड्रेन पर करीब 105 करोड़ रुपये की परियोजना का काम हुआ है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर के प्रमुख जलभराव वाले क्षेत्रों से वर्षा जल की निकासी को बेहतर करना है, लेकिन कई हिस्सों में नेटवर्क अभी निर्माण, विस्तार या कनेक्टिविटी की प्रक्रिया में है।

कहां रह गई कमी, क्यों नहीं निकलता पानी?

गुरुग्राम में जलनिकासी की सबसे बड़ी चुनौती इंटीग्रेटेड यानी एकीकृत नेटवर्क की कमी है। शहर में जीएमडीए, नगर निगम, एचएसवीपी, एनएचएआइ और अन्य एजेंसियां अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं।

अंदरूनी काॅलोनियों और सेक्टरों से निकलने वाला पानी कई जगह मुख्य ड्रेन तक पर्याप्त क्षमता वाले नेटवर्क से नहीं पहुंच पाता। दूसरी ओर कई पुराने नाले तेजी से बढ़े शहरी क्षेत्र और बढ़ते कंक्रीट क्षेत्र के कारण वर्षा का पानी संभालने में सक्षम नहीं हैं।

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2026 में फिर वही जलभराव वाले स्थान

इस मानसून में सुभाष चौक, राजीव चौक, हीरो होंडा चौक, महावीर चौक, सोहना रोड और गोल्फ कोर्स रोड जैसे प्रमुख स्थानों पर जलभराव सामने आया। नए गुरुग्राम के कई सेक्टरों के साथ मेदांता रोड और राजीव चौक के अंडरपास में भी पानी भरने से वाहन चालकों को परेशानी हुई।

यह हैं जिम्मेदार विभाग

गुरुग्राम के ड्रेनेज नेटवर्क की जिम्मेदारी किसी एक विभाग की नहीं है। जीएमडीए, नगर निगम, एचएसवीपी और एनएचएआइ अपने-अपने क्षेत्र और सड़कों के अनुसार ड्रेनेज से जुड़े कार्य करते हैं। लेकिन हर साल के दावे के बावजूद जलभराव हो रहा है।

ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में सीएम रहते फिर भी यह हाल

आजजन तथा शहर की बुनियादी समस्याएं दूर करने के लिए हर माह ग्रीवेंस कमेटी की बैठक होती है। वहीं जीएमडीए की बैठक दो माह में होती है। जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री खुद करते हैं। मानसून आने से पहले जलनिकासी की समस्या को लेकर समीक्षा बैठक भी होती है। मुख्यमंत्री निर्देश भी देते हैं पर असर तेज वर्षा में सड़कों पर बहते नजर आते हैं।

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"जलभराव नहीं हो इसकेे लिए बैठक की थी, अधिकारियों ने दावा किया था कि वर्षा के पानी के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी पानी निकासी तथा जल संचयन के लिए जनता के सुुझावों को प्राथमिकता देनी होगी।"

-राव इंद्रजीत सिंह,केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद गुड़गांव संसदीय सीट।

"जलभराव की पुरानी जगहों पर यह समस्या नहीं आई है। जहां पर जलभराव हुआ इसकी प्रमुख वजह क्या थी यह जांच की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर ही ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा।"

-पीसी मीणा, सीईओ , गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण।

आरोप- अधिकारी फील्ड पर नहीं जाते

"गुरुग्राम में जिम्मेदारी अधिकारी लगाने की जरूरत है। जो फील्ड में जाकर लोगों से संवाद कर समस्या का हल खोजे। कार्यालय में बैठक कर एजेंसियों के सहारे काम होगा तो आगे भी गुरुग्राम डूबेगा। अधिकारियों को यह भी नहीं पता होगा कि शहर के प्रमुख नाले कौन-कौन से होंगे। जब फील्ड में जाएंगे तो उन्हें पता चलेगा।"

-कुलभूषण भारद्वाज, पूर्व अध्यक्ष गुरुग्राम बार एसोसिएशन।

"गुरुग्राम का ढांचागत विकास नहीं किया गया, बिल्डरों ने नाले तो दूर सड़के तक नहीं छोड़ी, जहां पर वर्षा का पानी जमा होता था वहां पर बहुमंजिला इमारतें बन गई। वर्षा तो हमारे लिए वरदान है, जलभराव की समस्या जिम्मेदार अधिकारियों की वजह से हो रही है। सरकार रकम देती और वर्षा उसे बहा ले जाती है। हालात यह हैं कि घने बादल देख लोग घर की ओर चलने लगे हैं, क्योंकि सड़कें तालाब बन जाती है।"

-प्रवीण यादव, संयोजक यूनाइटेड गुरुग्राम आरडब्ल्यूए।

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"ड्रेनेज की समस्या को केवल नालों की सफाई या नए नाले बनाने तक सीमित नहीं है। पूरे शहर की जलनिकासी व्यवस्था का आकलन कर सभी एजेंसियों के नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ना जरूरी है। ऐसी हालत हो जाती है कि घर भी नहीं पहुंच पाते हैं।"

-मंदीप सेहरा, वरिष्ठ अधिवक्ता

"हर वर्ष जलभराव वाले वही स्थान सामने आ रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि समस्या बनी हुई है तो परियोजनाओं की गुणवत्ता, क्षमता और उनके आपसी कनेक्शन की समीक्षा की जरूरत है।"

-कुलदीप बोहरा, पूर्व पार्षद।

ये पांच जिम्मेदार

  • गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण : बड़े बरसाती नाले और मुख्य सड़कों का प्रबंधन की जिम्मेदारी मानसून से ठीक पहले तक बड़े नालों की गाद साफ कराने की पर यह काम ठीक से नहीं हुआ।
  • नगर निगम गुरुग्राम : अंदरूनी कालोनियों, सेक्टरों की सड़कें और छोटे नालों की सफाई कराने की जिम्मेदारी पर सफाई आधी अधूरी हुई
  • एनएचएआई : दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे (NH-48) और उसके सर्विस लेन की देखरेख, एनएचएआइ ने ड्रेनों की सफाई समय से नहीं कराई
  • हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण : नए सेक्टर्स का लेआउट, ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना। जो भविष्य को देखते हुए अपना काम करने में सफल नहीं रहा जो ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया वह 30 एमएम से अधिक वर्षा होने पर फेल हो जाता है।

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