100 करोड़ के फ्लैट वाली सोसायटी भी डूबी, गुरुग्राम की बारिश ने खोली ड्रेनेज सिस्टम की पोल; रेंगते रहे वाहन
गुरुग्राम में लगातार बारिश से गोल्फ कोर्स रोड समेत कई पॉश इलाके जलमग्न हो गए, जिससे करोड़ों के फ्लैट वाली सोसायटियों के सामने भी पानी भर गया। दिल्ली-ज ...और पढ़ें

यह तस्वीर साइबर हब के समीप गेटवे टावर मेट्रो के सामने की है। संजय गुलाटी
HighLights
गोल्फ कोर्स रोड पर करोड़ों की सोसायटियां भी जलमग्न हुईं।
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सात किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लगा।
शहर की जल निकासी व्यवस्था भारी बारिश में फिर फेल हुई।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। देश की सबसे महंगी आवासीय परियोजनाओं में शुमार गोल्फ कोर्स रोड पर स्थित कैमेलियाज और मैग्नोलियाज जैसी अल्ट्रा लग्जरी सोसायटियों के सामने भी शुक्रवार को वर्षा का पानी भर गया। इसी गोल्फ कोर्स रोड पर एक फ्लैट सौ करोड़ रुपये से अधिक कीमत में बिक चुका है, लेकिन लगातार दूसरे दिन हुई वर्षा ने इस प्रीमियम इलाके की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी।
दूसरी ओर दिल्ली-जयपुर हाईवे से लेकर पुराने गुरुग्राम की सड़कों तक जलभराव और ट्रैफिक जाम ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक गुरुग्राम तहसील क्षेत्र में 60 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
शुक्रवार को रुक-रुक कर दिनभर हुई वर्षा के कारण नए और पुराने गुरुग्राम के कई हिस्से पानी में डूब गए। जीएमडीए, नगर निगम, एचएसवीपी, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की जलनिकासी व्यवस्था एक बार फिर भारी वर्षा के सामने बेअसर साबित हुई। गोल्फ कोर्स रोड, दिल्ली-जयपुर हाईवे, शीतला माता रोड, ओल्ड दिल्ली रोड और शहर के कई प्रमुख मार्गों पर पानी भरने से घंटों तक यातायात प्रभावित रहा।
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सात किलोमीटर लंबा जाम
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर नरसिंहपुर, साइबर हब के समीप और उद्योग विहार के सामने सड़कें जलमग्न हो गईं। इफको चौक पर भी पानी भरने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसके चलते राजीव चौक से द्वारका एक्सप्रेसवे क्लोवरलीफ तक सात किलोमीटर से अधिक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। सामान्य दिनों में 20 मिनट का सफर लोगों ने करीब दो घंटे में पूरा किया। यातायात पुलिस को कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात कर व्यवस्था संभालनी पड़ी।
शीतला माता रोड और ओल्ड दिल्ली रोड पर बढ़ी परेशानी
शीतला माता रोड पर एक बार फिर बरसाती पानी भर गया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। ओल्ड दिल्ली रोड पर डूंडाहेड़ा के पास भी जलभराव के कारण लंबा जाम लगा रहा। कई दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए, जबकि चारपहिया वाहन भी रेंगते नजर आए।
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पुराने और नए गुरुग्राम में जलभराव
लगातार वर्षा के कारण सेक्टर-4, 7, 9, 9ए, 10, पटौदी रोड, बसई रोड, सेक्टर-34, मदनपुरी, न्यू कॉलोनी, लक्ष्मण विहार, राजेंद्र पार्क, सेक्टर-21, 22, 23, खांडसा, कादीपुर, वजीराबाद, सेक्टर-31, 39, 40, 50, 51 और 52 सहित अनेक क्षेत्रों में सड़कें जलमग्न रहीं। कई कॉलोनियों में घरों के बाहर तक पानी भर गया, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इन प्रमुख मार्गों पर दिनभर रेंगते रहे वाहन
दिल्ली-जयपुर हाईवे, हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक, बसई रोड, महरौली रोड, राजीव चौक से सिग्नेचर टावर तक दिल्ली की ओर जाने वाली लेन, अतुल कटारिया चौक से ओल्ड दिल्ली रोड, गोल्फ कोर्स रोड, सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर), धनकोट क्षेत्र और सेक्टर-102 में दिनभर वाहन जाम में फंसे रहे।
करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
लगातार दूसरे दिन हुए जलभराव ने जीएमडीए, नगर निगम, एचएसवीपी, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की तैयारियों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये के ड्रेनेज सुधार कार्यों के बावजूद शहर की प्रमुख सड़कें पानी में डूब गईं। हर वर्ष मानसून में यही स्थिति बनने से लोगों में नाराजगी है और स्थायी समाधान की मांग तेज हो गई है।
अगले दो दिन भी वर्षा के आसार
लगातार वर्षा के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दो दिनों तक भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। घने बादलों के बीच रुक-रुक कर वर्षा का दौर जारी रह सकता है।
कई निजी स्कूलों में अवकाश तो कहीं ऑनलाइन लगीं कक्षाएं
लगातार हो रही वर्षा और शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव का असर शुक्रवार को स्कूलों की पढ़ाई पर भी दिखाई दिया। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई निजी स्कूलों ने अवकाश घोषित कर दिया, जबकि कुछ स्कूलों ने ऑफलाइन कक्षाओं के स्थान पर आनलाइन पढ़ाई कराने का निर्णय लिया। स्कूल प्रबंधन ने बृहस्पतिवार देर शाम ही अभिभावकों को मोबाइल संदेश भेजकर इसकी जानकारी दे दी थी।
वर्षा के कारण शहर की कई प्रमुख सड़कें, कॉलोनियां और स्कूल परिसरों के आसपास जलभराव की स्थिति बनी रही। इसका असर सरकारी स्कूलों पर भी पड़ा। अभिभावकों का कहना है कि जब निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अवकाश घोषित किया गया है तो सरकारी स्कूलों में भी मौसम की स्थिति को देखते हुए इसी प्रकार का निर्णय लिया जाना चाहिए।