गुरुग्राम में 10000 करोड़ की रिहायशी परियोजना पर हाईकोर्ट की रोक, नई बुकिंग पर फिलहाल प्रतिबंध
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के सेक्टर-58 स्थित ओबेराय 360 नार्थ प्रोजेक्ट में नई यूनिटों के आवंटन पर रोक लगाई है। यह रोक परियोजना के लाइसे ...और पढ़ें
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10 हजार करोड़ की रिहायशी परियोजना पर हाईकोर्ट की रोक। एआई जनरेटेड
HighLights
ओबेराय 360 नार्थ में नई यूनिट आवंटन पर हाईकोर्ट की रोक।
परियोजना लाइसेंस वैधता पर डीटीसीपी निदेशक करेंगे अंतिम निर्णय।
8-10 हजार करोड़ की परियोजना में 350 यूनिट आवंटित।
संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के सेक्टर-58 स्थित ओबेराय रियल्टी की महत्वाकांक्षी रिहायाशी प्रोजेक्ट ओबेराय 360 नार्थ में फिलहाल किसी भी नई यूनिट के आवंटन और किसी नए खरीदार के पक्ष में अधिकार सृजित करने पर रोक लगा दी है।
यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (डीटीसीपी) के निदेशक परियोजना के लाइसेंस की वैधता को चुनौती देने वाली लंबित शिकायत पर फैसला नहीं कर देते। उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम में ओबेराय रियल्टी का यह पहला प्रोजेक्ट है।
यह अंतरिम आदेश न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने एडवांस इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (एआइपीएल) की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
याचिकाकर्ता ने 12 मई 2025 को जारी लाइसेंस संख्या-69 तथा 17 जून 2025 को लाइसेंस हस्तांतरण से संबंधित आदेश को चुनौती दी है। साथ ही ओबेराय रियल्टी के पक्ष में की गई बिक्री विलेख को भी निरस्त करने की मांग की गई है।
14.816 एकड़ भूमि पर विकसित
याचिका के अनुसार, सेक्टर 58 में लगभग 14.816 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही इस रिहायशी परियोजना का लाइसेंस हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 के प्रावधानों के विपरीत जारी किया गया है।
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इसके अलावा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) से जुड़े नियमों के उल्लंघन के भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये केवल याचिकाकर्ता के आरोप हैं और अदालत ने इनकी सत्यता पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।
350 रिहायशी यूनिटों का आवंटन किया जा चुका
वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि परियोजना की अनुमानित लागत 8,000 से 10,000 करोड़ के बीच है। अब तक करीब 350 रिहायशी यूनिटों का आवंटन किया जा चुका है और खरीदारों से लगभग 750 करोड़ की राशि प्राप्त की जा चुकी है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि यदि विवाद के अंतिम निस्तारण से पहले और आवंटन किए गए तो भविष्य के खरीदारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं तथा विवाद और जटिल हो जाएगा।
अदालत को बताया गया
हरियाणा सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि लाइसेंस निरस्त करने की मांग वाली शिकायत हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा-8 के तहत टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (डीटीसीपी) के निदेशक के समक्ष लंबित है।
इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को निर्धारित है। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।ॉ
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याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024 में इसी भूमि से जुड़े मामले में एआईपीएल की शिकायत पर आइरियो और ओबेराय रियल्टी के विरुद्ध कथित मिलीभगत और धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, उस प्राथमिकी पर वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा रखी है और मामला अभी विचाराधीन है।