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    इंसानों के बीच रहने वाला लंगूर अब सीख रहा अपनों के बीच जीने का सलीका, फतेहाबाद में व्यक्ति के कब्जे से छुड़ाया गया

    Updated: Thu, 30 Apr 2026 11:04 AM (IST)

    फतेहाबाद से बचाए गए 4.5 वर्षीय नर लंगूर का हिसार वन्यप्राणी विभाग में पुनर्वास चल रहा है। इंसानों के बीच रहने के कारण अपना प्राकृतिक व्यवहार भूला यह ल ...और पढ़ें

    हिसार वन्यप्राणी विभाग में इंसानों से छुड़ाया गया लंगूर सीख रहा जंगली जीवन।

    हिसार वन्यप्राणी विभाग में इंसानों से छुड़ाया गया लंगूर सीख रहा जंगली जीवन।

    HighLights

    1. फतेहाबाद से छुड़ाया गया 4.5 वर्षीय नर लंगूर

    2. हिसार वन्यप्राणी विभाग में चल रहा पुनर्वास प्रशिक्षण

    3. जल्द ही प्राकृतिक समूह में छोड़ा जाएगा लंगूर

    नमहा यादव, हिसार। इंसानी बस्तियों की चकाचौंध और अकेलेपन की जंजीरों को तोड़कर एक बेजुबान अब अपनी असली दुनिया की ओर कदम बढ़ा रहा है। फतेहाबाद के एक निजी कब्जे से छुड़ाए गए करीब साढ़े चार वर्षीय नर लंगूर के लिए हिसार का वन्यप्राणी विभाग इन दिनों 'पुनर्वास पाठशाला' बना हुआ है।

    यहां उसे किसी किताब से नहीं, बल्कि प्रकृति के सानिध्य में रहकर अपने ही साथियों के बीच सामंजस्य बिठाने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। जब इस लंगूर को हिसार के डियर पार्क स्थित वन्यप्राणी विभाग के प्रशासनिक भवन में लाया गया, तो वह गहरे सदमे में था।

    सालों तक इंसानों के बीच अकेले रहने से वह अपनी प्रजाति के व्यवहार को भूल चुका था। शुरुआत में वह आसपास मौजूद बंदरों और अन्य वन्यजीवों को देखकर सहम जाता था। विभाग की देखरेख ने चमत्कारिक असर दिखाया है। दो हफ्तों में उसके डर की जगह अब जिज्ञासा और आत्मविश्वास ने ले ली है।

    अब बंदरों में लंगूर की धाक

    प्रशिक्षण के शुरुआती दौर में जो लंगूर बंदरों से दूरी बनाता था, अब नजारा उसके विपरीत है। जैसे-जैसे लंगूर का प्राकृतिक स्वभाव जागृत हो रहा है, अब बंदर उससे थोड़ा सतर्क रहने लगे हैं। वह सहजता से उनके बीच जाता है और उनके सामाजिक ढांचे को समझने की कोशिश कर रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि लंगूर अब जंगल में नेतृत्व करने और अपना अस्तित्व बचाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रहा है।

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    30 दिनों का 'अभ्यास' व फिर खुली हवाएं

    वन्यप्राणी विभाग का स्टाफ अगले 15 से 30 दिनों तक इस लंगूर की गतिविधियों पर सूक्ष्म नजर रखेगा। इस "ट्रेनिंग पीरियड" के पूरा होते ही उसे तलवंडी राणा या गांव ढाया स्थित श्याम बाबा मंदिर क्षेत्र में छोड़ने की योजना है। इन क्षेत्रों को चुनने का मुख्य कारण वहां पहले से मौजूद लंगूरों का विशाल समूह है, जहां वह अपनी टोली पा सकेगा।

    यह नर लंगूर लगभग साढ़े चार साल का है। इंसानी परिवेश से निकलकर वन्यजीवों के बीच ढलना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। हम इसे प्रशिक्षित कर रहे हैं ताकि यह प्राकृतिक समूह में खुद को सुरक्षित रख सके। जल्द ही इसे इसके कुनबे में छोड़ दिया जाएगा। -दिनेश जांगड़ा, इंस्पेक्टर, वन्यप्राणी विभाग, हिसार