उम्रकैद काट रहे दोषियों की बढ़ी मुश्किलें, रेलूराम हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट में अधूरी रही बहस
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया परिवार हत्याकांड के दोषियों सोनिया और संजीव की समय पूर्व रिहाई पर बहस हुई।
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रेलूराम हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- समय पूर्व रिहाई को फांसी में बदला जा सकता है।
HighLights
रेलूराम पूनिया हत्याकांड में दोषियों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट में बहस
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, रिहाई को फांसी के फैसले में बदल सकते हैं
बहस पूरी नहीं हुई, मामले की अगली सुनवाई जल्द होगी
जागरण संवाददाता, हिसार। पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया परिवार हत्याकांड में दोषी सोनिया और संजीव की समय पूर्व रिहाई के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दोषियों के अधिवक्ताओं की तरफ से बहस की गई। मगर बहस पूरी नहीं हो पाई।
अब आगामी तारीख पर बहस होगी। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता आईना वर्मा खोवाल और लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि आरोपितों के वकीलों ने बहस करते हुए कहा कि समय पूर्व रिहाई संवैधानिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने साल 1967 के नरेश श्रीधरन फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी बेंच के फैसले को छोटी बेंच नहीं बदल सकती। सुप्रीम कोर्ट समय पूर्व रिहाई को फांसी के फैसले में बदल सकता है। इस तारीख पर बहस पूरी नहीं हो सकी। अब इस मामले में आगामी तारीख पर बहस होगी। अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया हमारी तरफ से बहस पूरी हो चुकी है।
यह था मामला
23 अगस्त 2001 की रात को लितानी गांव में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया के फार्म हाउस पर सोनिया और संजीव ने मिलकर आठ लोगों की बेरहमी से हत्या की थी।
दोनों ने मिलकर रेलूराम पूनिया, उनकी पत्नी कृष्णा देवी , भाई सुनील, उसकी पत्नी शकुंतला, बहन प्रियंका, चार साल के लोकेश, दो साल की सिवानी और 45 दिन की प्रीति की लोहे की राड़ से हमला कर हत्या की थी। उसके बाद सोनिया कार में बैठाकर संजीव को सुरेवाला चौक तक छोड़ कर आई थी। सुबह सोनिया बाथरूम में बेसुध हालत में मिली थी। उसके मुंह से झाग निकल रहे थे।
उसके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला था। बाद में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया तो जघन्य हत्याकांड का खुलासा हुआ था। 2004 में कोर्ट ने सोनिया और संजीव को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में दोनों की सजा को उम्रकैद में बदला था।
