यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 14, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Haryana Weather Today: गेहूं-सरसों भीगी, पांच जिलों में ज्यादा नुकसान, मंडियों में पड़ा था अनाज; जानें आज का मौसम
खेत में खड़ी फसल खराब होने का भी किसानों को डर सताने लगा है। अगले दो दिन तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। अनाज से अटी मंडियां खुले में पड़ा लाखों टन सरसों औ ...और पढ़ें

HighLights
- पांच जिलों में ज्यादा नुकसान मंडियों में पड़ा था अनाज।
- आज ओलावृिष्ट की भी संभावना।
- अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहा अन्न।
जागरण टीम l चंडीगढ़/हिसार। (Haryana Weather Hindi News) प्रदेश में नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से दोपहर बाद रोहतक सहित पांच जिलों में आंधी के साथ वर्षा हुई। इससे मंडियों में खुले में पड़ा लाखों टन गेहूं और सरसों भीग गई। वहीं, रविवार को भी प्रदेश में ओलावृष्टि व वर्षा की संभावना है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार (Hisar News) के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने दो दिन तक मौसम परिवर्तनशील रहने की संभावना जताई है। वहीं खेत में खड़ी फसल और मंडी में रखी फसल के खराब होने का डर भी किसानों को सता रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की तरफ से हरियाणा में 13 रात से 15 तक मौसम में बदलाव के साथ दो पश्चिमी विक्षोभ के चलते वर्षा की संभावना व्यक्त की थी।
हिसार में सुबह से ही मौसम में बदलाव रहा। वहीं प्रदेश के सिरसा, भिवानी, पानीपत, झज्जर, रोहतक जिलों में हल्की वर्षा हुई है। गेहूं की फसल पर दाना बना हुआ है। हवा चलने से फसल की बाली नीचे गिरने का डर बना हुआ है। वहीं प्रदेश की मंडियों में सरसों और गेहूं की आवक पीक पर है, लेकिन ढीला उठान किसानों के लिए मुसीबत बना है।
सरसों की आवक में भी तेजी
मंडियों व खरीद केंद्रों पर तेजी से सरसों की आवक हो रही है। मंडियों में अभी तक छह लाख 60 हजार टन सरसों पहुंच चुकी है, जिसमें पांच लाख 15 हजार टन की खरीद हुई है। अभी तक करीब दो लाख टन ही सरसों उठान हुई है। किसानों का आरोप है कि अगर खरीद कर ली जाती तो कम से कम वर्षा होने की चिंता तो नहीं सताती।
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अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहा अन्न
मंडियों में लाखों टन गेहूं और सरसों खुले में पड़े होने के बावजूद अव्यवस्था फैली है। शनिवार दोपहर को हुई वर्षा से सरसों, गेहूं को भारी नुकसान हुआ है। अनाजमंडी में वर्षा से बचाव के लिए तिरपाल इत्यादि के फिलहाल कोई विशेष इंतजाम नहीं किए गए थे। वर्षा होने पर किसान अपने स्तर पर अन्न को बचाने के लिए तिरपाल लेकर दौड़े। मंडी के कवर्ड शेड भी हजारों टन अनाज भरा है।
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