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    बंद पड़े कुएं बन रहे 'गैस चैंबर', जैविक कचरा सड़ने से बन रही जहरीली गैसें ले रही हैं जिंदगियां

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 12:21 PM (GMT+05:30)

    दशकों से बंद पड़े कुएं जैविक कचरे के सड़ने से जहरीली गैसों के 'गैस कक्ष' बन जाते हैं, जो जानलेवा साबित होते हैं। ...और पढ़ें

    बंद पड़े कुएं बन रहे 'गैस चैंबर' (फोटो: जागरण)

    बंद पड़े कुएं बन रहे 'गैस चैंबर' (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. बंद कुएं जैविक कचरे से जहरीले गैस कक्ष बन जाते हैं।

    2. हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड जानलेवा गैसें हैं।

    3. सुरक्षा उपकरणों के बिना कुएं में उतरना अत्यंत खतरनाक है।

    जागरण संवाददाता, झज्जर। ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं या जलस्त्रोत जब लगातार कई सालों तक बगैर इस्तेमाल के छोड़ दिए जाते हैं, तो वे एक प्रकार के ''गैस कक्ष'' में तब्दील हो जाते हैं। लंबे समय तक पानी का इस्तेमाल नहीं होने और रखरखाव के अभाव में कुएं के भीतर ऐसी विषम परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं, जो इंसान के लिए जानलेवा साबित होती हैं।

    ऐसे में किसी भी पुराने या बंद कुएं में बिना पुख्ता सुरक्षा उपकरणों के उतरना सीधे तौर पर मौत को दावत देना है। ऐसे स्थानों पर रेस्क्यू या सफाई के लिए उतरने से पहले आक्सीजन सिलेंडर और गैस मास्क का उपयोग करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, गैस के दबाव को जांचने के लिए पूरी सतर्कता बरती जानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के हादसे को टाला जा सके।

    क्यों बनती हैं जहरीली गैसें?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, जब कोई कुआं या जलस्त्रोत दशकों तक बंद रहता है, तो उसमें पेड़-पौधों के पत्ते, मरे हुए जीव-जंतु और अन्य जैविक कचरा गिरता रहता है। धूप और ताजी हवा का ज्यादा प्रवेश न होने के कारण यह कचरा कुएं की तली में पानी के साथ सड़ने लगता है। आक्सीजन की कमी के बीच बैक्टीरिया इस जैविक कचरे को सड़ाते हैं, जिससे कई प्रकार की घातक गैसों का निर्माण होता है।

    हाइड्रोजन सल्फाइड : यह सबसे खतरनाक गैसों में से एक है, जो सड़े हुए अंडे जैसी बदबू देती है। इसके उच्च स्तर के संपर्क में आने पर इंसान की सूंघने की क्षमता तुरंत खत्म हो जाती है और पल भर में बेहोशी छा जाती है।

    मीथेन: यह एक ज्वलनशील गैस है जो आक्सीजन के स्तर को तेजी से गिरा देती है। इसके कारण कुएं के अंदर अचानक आग लगने या धमाका होने का खतरा भी रहता है।
    कार्बन डाइआक्साइड : यह गैस कुएं के भीतर आक्सीजन को पूरी तरह खत्म कर देती है और सांस घुटने का मुख्य कारण बनती है।

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    शरीर पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव

    दम घुटना : कुएं के निचले हिस्से में आक्सीजन का स्तर शून्य हो सकता है, जिससे वहां उतरने वाले व्यक्ति का तुरंत दम घुटने लगता है।
    तंत्रिका तंत्र पर असर: जहरीली गैसें सीधा तंत्रिका तंत्र पर हमला करती हैं। इससे चक्कर आना, उल्टी होना और आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसे लक्षण दिखते हैं।
    त्वरित मृत्यु की संभावना: हाइड्रोजन सल्फाइड के अधिक सांद्रण वाले क्षेत्र में सांस लेने पर महज कुछ सेकंड में फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं। चिकित्सीय सहायता पहुंचने से पहले ही व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।