बंजर जमीन पर कैसे हो खेती? हरियाणा के किसान ने लगाया दिमाग, शुरू किया झींगा पालन का बिजनेस; आज कमा रहा ₹140000 महीना
झज्जर के किसान श्यामपाल चौहान ने खारे पानी से बंजर पड़ी अपनी 2 हेक्टेयर जमीन को झींगा पालन के माध्यम ...और पढ़ें

झज्जर:खारे पानी के तालाब में जाल डालकर झींगा मछली पकडते हुए। डीपीआरओ
HighLights
खारे पानी से बंजर जमीन पर झींगा पालन शुरू किया
मत्स्य विभाग से प्रशिक्षण और सरकारी योजना का लाभ लिया
सालाना 15-17 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे
जागरण संवाददाता, झज्जर। कभी अत्यधिक खारे पानी के कारण जिस जमीन पर खेती करना असंभव था, आज वही जमीन गांव कुतानी निवासी किसान श्यामपाल चौहान व उनकी पत्नी मीना चौहान के परिवार के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी है।
सरकार के 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामने आई यह सफलता की कहानी साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और नई सोच का साथ मिले, तो चुनौतियों को भी बड़े अवसरों में बदला जा सकता है।
श्यामपाल के पास सिर्फ 2 हेक्टेयर जमीन थी
श्यामपाल के पास करीब 2 हेक्टेयर जमीन थी, जो खारे पानी के भराव के कारण बंजर पड़ी थी। जमीन को बेकार छोड़ने के बजाय उन्होंने वैकल्पिक उपाय तलाशना शुरू किया। इस दौरान उन्हें खारे पानी वाले क्षेत्रों में झींगा पालन की संभावनाओं का पता चला। उन्होंने तुरंत झज्जर स्थित मत्स्य विभाग से संपर्क साधा।
विभाग ने उन्हें तालाब निर्माण, झींगा बीज (सीड) डालने, पानी की गुणवत्ता नियंत्रित रखने और आधुनिक रखरखाव का गहन प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण के बाद श्यामपाल ने 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' के दिशा-निर्देशों के तहत भाटेरा क्षेत्र में स्थित अपनी जमीन पर तालाब तैयार करवाया। उन्होंने शुरुआत में करीब 40 लाख रुपये का निवेश कर झींगा पालन शुरू किया। शुरुआती तकनीकी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने विभागीय सलाह के अनुसार काम किया और पीछे मुड़कर नहीं देखा।
18 टन झींगा उत्पादन हुआ
उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2024-25 में जहां 18 टन झींगा उत्पादन हुआ, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 20 टन तक पहुंच गया। बाजार में उन्हें 380 से 480 रुपये प्रति किलोग्राम तक का दाम मिल रहा है।
आज तमाम खर्चे निकालने के बाद श्यामपाल को सालाना 15.90 लाख से 17 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो रही है। श्यामपाल का कहना है कि सरकारी मार्गदर्शन और योजना ने उनकी बंजर जमीन को सोने में बदल दिया है, जो जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
