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35 साल बाद हुआ चमत्कार! जींद में SIR वेरिफिकेशन के दौरान सालों बाद मिले बिछुड़े भाई

Published: Fri, 04 Sep 2026 10:44 PM (IST)

जींद में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया 35 साल से बिछड़े दो भाइयों के मिलन का जरिया बनी। मनोहरपुर गांव ...और पढ़ें

एसआईआर ने मिलाया 35 साल से बिछड़े दो भाइयों को।

एसआईआर ने मिलाया 35 साल से बिछड़े दो भाइयों को।

HighLights

  1. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने बिछड़े भाइयों को मिलाया।

  2. 35 साल बाद जींद के मनोहरपुर में हुआ मिलन।

  3. पोलियो इलाज के बाद परिवार से बिछड़ गए थे सीताराम।

जागरण संवाददाता, जींद। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 35 वर्ष के बिछुड़े दो भाइयों के मिलन का सेतु बना। एक छोटे से सत्यापन के दौरान पूछे गए सवाल दोनों की जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी का कारण बन गए।

मनोहरपुर गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में दोनों भाई जैसे ही दोनों आमने-सामने हुए तो आंसू न रोक सके और गले मिले। दोनों का नौ सेकेंड का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। एडिशनल एइआरओ राजेश और बीएलओ कृष्ण कुमार भाइयों के मिलन की कड़ी बने।

पंजाब के अमृतसर के गांव लोहारका स्थित सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत 55 वर्षीय सीताराम दो सितंबर को पैतृक गांव मनोहरपुर में स्कूल से प्रमाणपत्र लेने पहुंचे थे। वहां मौजूद बीएलओ कृष्ण ने एसआईआर सत्यापन के दौरान उनसे गांव, पिता और भाई का नाम पूछा।

भाई का नाम सामने आते ही बीएलओ ने उनके भाई बलबीर को काल की और सीताराम के बारे में पूछा। सीताराम का नाम सुनते ही बलबीर ने कहा- 'हां, वह मेरा भाई है। मैं पिछले 35 साल से उसे ढूंढ़ रहा हूं।' इसके बाद बलबीर तत्काल स्कूल पहुंचे। दोनों भाइयों ने जैसे ही एक-दूसरे को देखा, पहचानने में देर नहीं लगी। दोनों गले मिले और फूट-फूटकर रोने लगे।

पोलियो के इलाज के लिए छोड़ आए थे पंजाब

बलबीर ने बताया कि सीताराम पोलियो से ग्रस्त है। 20 वर्ष की आयु में करीब 35 साल पहले परिवार के लोग उसे इलाज के लिए पंजाब लेकर गए थे। वहां करीब एक माह तक लगातार उसकी मालिश होनी थी। इसलिए परिवार वाले उसे वहीं छोड़ आए थे। एक महीने बाद जब उसे लेने पंजाब पहुंचे तो सीताराम वहां नहीं मिला। इसके बाद परिवार ने उसे काफी तलाशा, लेकिन वह नहीं मिला। हम तो उसके मिलने की उम्मीद छोड़ चुके थे।

नहीं बनना चाहता था परिवार पर बोझ

सीताराम ने दैनिक जागरण को बताया कि वह परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहता था। घर लौटने के बजाय उसने वहीं एक निजी स्कूल में चपरासी की नौकरी शुरू कर दी। उसे डर था कि घर लौटने पर नौकरी छूट जाएगी। बाद में उसे सरकारी नौकरी मिल गई और वह वहीं रह गया।

सीताराम छह भाइयों में पांचवें नंबर पर है। शुक्रवार सुबह चार बजे ट्रेन से एक भाई उनके साथ पंजाब गया है, ताकि वह वहां सीताराम के रहने की जगह और परिस्थितियों को देख सके। परिवार अब चाहता है कि 35 साल बाद जुड़ा रिश्ता फिर कभी न टूटे।

मेरे जीवन के यादगार पल

एडिशनल एईआरओ डॉ. रमेश कुमार ने इस घटना को अपने जीवन के यादगार पल बताए। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक सत्यापन की प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि मानवीय रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बन गई। बीएलओ की सजगता और एसआईआर के सामान्य सवालों ने वर्षों से बिछड़े दो भाइयों को फिर से मिला दिया।

इसलिए स्कूल आया सीताराम

पंजाब में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। 35 वर्ष से पंजाब में रह रहे सीताराम को मतदाता सूची में नाम सत्यापन के लिए स्कूल का प्रमाणपत्र चाहिए था, इसीलिए वह गांव के सरकारी स्कूल में आए थे।

क्या है एसआईआर

विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची में दर्ज नाम और विवरण का सत्यापन किया जाता है। पात्र लोगों के नाम सूची में दर्ज होने के लिए मतदाता की पात्रता और संबंधित रिकार्ड का सत्यापन किया जाता है। इसके लिए 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं है तो उम्र और पते का प्रमाण होना आवश्यक है।