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'फर्जी तरीके से काटी गई थी रसीद', कैथल में पूर्व विधायक की मां को दी गई पंचायती जमीन की बोली रद; जांच के आदेश

Published: Wed, 26 Aug 2026 06:21 AM (IST)

गुहला एसडीएम कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर की मां के नाम ली गई साढ़े दस एकड़ पंचायती भूमि की ...और पढ़ें

पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर। फाइल फोटो

पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर। फाइल फोटो

HighLights

  1. पूर्व विधायक बाजीगर की मां के नाम लीज रद्द।

  2. गुहला एसडीएम कोर्ट ने फर्जीवाड़े के आरोप पर कार्रवाई की।

  3. बीडीपीओ को दस दिन में कब्जा छुड़ाने के आदेश।

जागरण संवाददाता, कैथल। पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर की मां के नाम लीज पर ली गई पंचायती भूमि की बोली को गुहला एसडीएम कोर्ट ने रद कर दिया है। गांव भूना में पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर की माता के नाम साढ़े दस एकड़ जमीन लीज पर ली गई थी। शुरुआत से ही ग्रामीण आरोप लगा रहे थे कि फर्जी तरीके से लीज की रसीद काटी गई है। ग्रामीणों ने डीसी अपराजिता के अलावा सीएम नायब सिंह सैनी को भी शिकायत की थी।

गुरमीत राम ने गुहला एसडीएम की कोर्ट में डाली याचिका में आरोप लगाए थे कि जुलाई माह की एक तारीख को भरवारी देवी के नाम ग्राम पंचायत भूना की साढ़े दस एकड़ जमीन की लीज की रसीद गलत तरीके से काटी गई है। बोली से पहले गांव में कोई मुनादी नहीं करवाई गई।

जमीन की रसीद फर्जी तरीके से काट दी

वह जमीन को 20 हजार रुपये प्रति एकड़ लेने को तैयार था, लेकिन उसे यह जमीन नहीं दी गई। आरोप है कि पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर के दबाव में उसकी मां के नाम जमीन की रसीद फर्जी तरीके से काट दी गई। गांव के रोहित शर्मा और नेत्रपाल शर्मा ने भी एसडीएम को एक शिकायत दी, जिसमें जमीन की रसीद 1-7-26 को काटी दिखाई गई है, जबकि भरवारी देवी का आधार कार्ड 14-7-26 को गांव भूना में दिखाया गया है।

दस एकड़ जमीन की बोली रद 

एसडीएम ने गांव के अन्य लोगों के भी बयान दर्ज किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एसडीएम कोर्ट ने भुना गांव में भरवारी देवी के नाम काटी गई साढ़े दस एकड़ जमीन की बोली को रद कर दिया। बीडीपीओ को दस दिन के अंदर जमीन से कब्जा छुड़ाने और जिन अधिकारियों, सरपंच, ग्राम सचिव और एक पंच ने यह बोली करवाई थी, उनकी जांच करने के बाद कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए।

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व विधायक ने अपने प्रभाव में गलत तरीके से जमीन की लीज अपनी मां के नाम करवा ली थी, लेकिन एसडीएम की कोर्ट निष्पक्ष फैसला दिया है। ग्रामीण इस फैसले का स्वागत करते हैं।