यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Haryana News: इधर नोटिस-नोटिस खेलते रहे आबकारी विभाग के अधिकारी, उधर 44 करोड़ पी गए शराब कारोबारी
साल 2015 से 2023 तक लगभग ने आठ सालों में शराब के कोरोबारियों ने आबकारी विभाग के अधिकारियों से साठगांठ करके सरकार को 44 करोड़ से ज्यादा का चूना लगाया। ...और पढ़ें

HighLights
- आठ सालों से नोटिस देने का खेलते रहे खेल।
- खुलेआम चलता अवैध शराब का धंधा।
- डिफाल्टरों के नाम पर नहीं संपत्ति।
नरेंद्र पंडित, करनाल। (Haryana Crime Hindi News) वर्ष 2015 से 2023 तक लगभग 46 शराब फर्मों के ठेकेदारों ने आबकारी विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकार को 44 करोड़ दो लाख 98 हजार रुपये का चूना लगा दिया। ठेकेदारों ने आबकारी विभाग से बेचने के लिए शराब तो ली, लेकिन शराब बेचकर केवल अपनी जेबें भरने का काम किया।
आठ सालों से नोटिस देने का खेलते रहे खेल
सरकारी खजाने में फीस जमा नहीं कराई। यह रहस्योद्घाटन सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। आठ वर्षों से अधिकारी संबंधित फर्मों को केवल नोटिस देने का खेल खेलते रहे। आने वाले नई फर्मों के लिए सरकारी खजाने में सेंधमारी का मार्ग खोल रहे हैं।
खुलेआम चलता अवैध शराब का धंधा
खुलेआम चलता अवैध शराब का धंधा इसका प्रमाण है। यह पूरा खेल मिलीभगत के कारण किया गया। जिला आबकारी अधिकारी नीरज का कहना है कि सरकारी रिकवरी के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं। वर्तमान वर्ष की 95% से अधिक रिकवरी हो चुकी है।
पिछली रिकवरी जो पेंडिंग है उनके लिए संबंधित फर्म को नोटिस दिए जाते हैं। फिर भी कोई रिकवरी जमा न कराए तो राजस्व विभाग को संपत्ति की नीलामी कराने के लिए लिख दिया जाता है।
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डिफाल्टरों के नाम पर नहीं संपत्ति
आबकारी विभाग और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के सामने सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखा शराब फर्मों के मालिक फीस हड़प गए। आबकारी विभाग फीस जमा न कराने पर नोटिस पर नोटिस के बाद संपत्ति नीलामी के लिए राजस्व विभाग को लिखता है।
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हाल ही में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न विभागों की करीब पांच अरब रुपये की रिकवरी नहीं हो सकी, क्योंकि संबंधित डिफाल्टरों के नाम पर कोई संपत्ति ही नहीं मिली। इनमें आबकारी विभाग के डिफाल्टर भी शामिल हैं।