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हर्ष एनकाउंटर: CBI या सिटिंग जज से जांच की मांग, रोड़ समाज ने तीसरी मांग पर नायब सरकार को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

Published: Sun, 06 Sep 2026 05:21 AM (IST)

रोड़ समाज ने हर्ष एनकाउंटर मामले की सीबीआई या सिटिंग जज से जांच की मांग पर सरकार को सात दिन ...और पढ़ें

रोड़ समाज ने तीसरी मांग पर नायब सरकार को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम। फोटो जागरण

रोड़ समाज ने तीसरी मांग पर नायब सरकार को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम। फोटो जागरण

HighLights

  1. हर्ष एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग लंबित।

  2. सरकार को तीसरी मांग पूरी करने को सात दिन।

  3. प्रदर्शन पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग।

जागरण संवाददाता, करनाल। हर्ष एनकाउंटर मामले को लेकर रोड़ समाज की शनिवार को रोड़ धर्मशाला में बैठक हुई। बैठक में समाज के लोगों ने सरकार के समक्ष रखी गई तीसरी मांग को लेकर मंथन किया। अखिल भारतीय रोड़ महासभा के प्रधान बलकार सिंह ने कहा कि सरकार ने उनकी तीन में से दो मांगें मान ली हैं, जिससे समाज संतुष्ट है, लेकिन हर्ष एनकाउंटर मामले की सीबीआइ अथवा सिटिंग जज से जांच कराने की मांग अभी लंबित है।

समाज ने सरकार को इस मांग को पूरा करने के लिए सात दिन का समय दिया है। सात दिन में मांग पूरी नहीं हुई तो आठवें दिन समाज की दोबारा बैठक बुलाकर कड़ा निर्णय लिया जाएगा।
इससे पहले, सुबह रोड़ धर्मशाला में रोड़ महासभा की कार्यकारिणी, संघर्ष समिति समेत डेलीगेटस की बैठक हुई।

अधिकारियों के तबादले और खिलाफ कार्रवाई

प्रधान बलकार सिंह ने बताया कि हर्ष एनकाउंटर मामले को लेकर समाज ने सरकार के सामने तीन मांगें रखी थीं। पहली मांग करनाल विधायक द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर समाज से माफी मांगने की थी। दूसरी मांग एनकाउंटर में शामिल अधिकारियों के तबादले और उनके खिलाफ कार्रवाई की थी।

तीसरी मांग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआइ अथवा सिटिंग जज से कराने की थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहली और दूसरी मांग मान ली है, लेकिन तीसरी मांग अभी तक पूरी नहीं की गई है। इससे समाज में रोष है। केवल आइपीएस अधिकारियों के तबादले से कुछ नहीं होगा, बल्कि उनकी जांच की जाए और उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए।

किसके कहने पर दर्ज की गई समाज पर एफआईआर

बैठक में 24 अगस्त को हुए प्रदर्शन के मामले में दर्ज एफआइआर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। बताया गया कि ऊंचा समाना गांव के सतबीर गोस्वामी की शिकायत पर 26 अगस्त को सिविल लाइन थाना पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ जाति और धर्म के नाम पर दंगे भड़काने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

समाज के लोगों ने कहा कि उन्हें इस एफआइआर की जानकारी अब मिली है। बैठक में हिसम सिंह, ईलम सिंह, कर्मवीर सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि यह एफआइआर एक षड्यंत्र के तहत दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि 24 अगस्त के प्रदर्शन के दौरान समाज की ओर से किसी धर्म, समाज या व्यक्ति के खिलाफ अपशब्द नहीं कहे गए थे।

इसके बावजूद जाति और धर्म के नाम पर दंगे भड़काने का मामला दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआइआर दर्ज कराने के पीछे एसपी नरेंद्र बिजारणिया का हाथ हो सकता है और इसमें किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका की भी आशंका है। समाज ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

एफआइआर रद कर जांच कराने की मांग

महासभा के प्रधान बलकार सिंह ने सरकार से सिविल लाइन थाना में दर्ज एफआइआर को तुरंत रद करने और यह जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि शिकायतकर्ता ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से माफी भी मांगी है, लेकिन इसके बावजूद समाज इस पूरे प्रकरण की जांच चाहता है, ताकि एफआइआर दर्ज कराने के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सके।

प्रधान बोले- रेस्ट हाउस में तीन बार खड़ा हुआ था

बैठक में बलकार सिंह ने विधायक जगमोहन आनंद की ओर से समाज से माफी मांगने के घटनाक्रम की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि विधायक जगमोहन आनंद द्वारा माफी मांगने से पहले रेस्ट हाउस में क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी समाज के लोगों को नहीं है।

बलकार सिंह के अनुसार, उस दिन रेस्ट हाउस में विधायक ने कहा था कि उनके शब्दों से यदि किसी समाज को ठेस पहुंची है तो वह अपने शब्द वापस लेते हैं। इस दौरान वे (बलकार) तीन बार खड़े हुए और विधायक से स्पष्ट रूप से माफी मांगने को कहा। इसके बाद विधायक ने मीडिया के सामने समाज से माफी मांगी।