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    हरियाणा में एक हजार एकड़ पर स्मार्ट बागवानी का रोडमैप तैयार, पारंपरिक खेती से डिजिटल क्रांति की ओर मुड़ेंगे किसान

    Updated: Fri, 29 May 2026 08:01 AM (GMT+05:30)

    हरियाणा सरकार ने 1000 एकड़ क्षेत्र में स्मार्ट बागवानी का रोडमैप तैयार किया है, जिसमें एरोपोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। ...और पढ़ें

    हरियाणा में एक हजार एकड़ पर स्मार्ट बागवानी का रोडमैप तैयार (जागरण फोटो)

    हरियाणा में एक हजार एकड़ पर स्मार्ट बागवानी का रोडमैप तैयार (जागरण फोटो)


    HighLights

    1. 1000 एकड़ में स्मार्ट बागवानी का रोडमैप तैयार।

    2. एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल।

    3. 2030 तक बागवानी क्षेत्र दोगुना, उत्पादन तीन गुना।

    प्रदीप शर्मा, करनाल। खाद्यान्न के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने वाला हरियाणा अब एक और ऐतिहासिक कृषि परिवर्तन की दहलीज पर है। सरकार ने एक हजार एकड़ क्षेत्र को अत्याधुनिक स्मार्ट बागवानी के दायरे में लाने का रोडमैप तैयार किया है। यह महत्वाकांक्षी योजना पूरे प्रदेश में मांग आधारित क्लस्टर माडल से धरातल पर उतरेगी।

    जलवायु परिवर्तन, गिरते भूजल स्तर और छोटी होती जोत जैसी गंभीर चुनौतियों के बीच यह पहल एरोपोनिक्स (हवा में खेती), हाइड्रोपोनिक्स (पानी में खेती), वर्टिकल फार्मिंग (बहुमंजिला खेती) और सेंसर-आधारित ग्रीन हाउस तकनीकों से प्रदेश के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने जा रही है। इसका सीधा उद्देश्य वर्ष 2030 तक राज्य में बागवानी क्षेत्र को दोगुना और कुल उत्पादन को तीन गुना करना है।

    जानें किस जिले को क्या मिली जिम्मेदारी

    सरकार 1,000 एकड़ के लक्ष्य को मांग और क्लस्टर आधारित माडल पर लागू कर रही है, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों को उनकी मौजूदा विशेषज्ञता के आधार पर प्राथमिकता दी जा रही है।

    दिल्ली-एनसीआर बेल्ट

    गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर जिलों को प्रीमियम और कमर्शियल हाइड्रोपोनिक्स एवं इनडोर वर्टिकल फार्मिंग के लिए चुना गया है। दिल्ली और गुरुग्राम के पांच सितारा होटलों, प्रीमियम सुपर मार्केट के नजदीक होने के कारण यहां लेट्यूस, चेरी टमाटर, रंगीन शिमला मिर्च और स्ट्राबरी जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों की सीधे मार्केटिंग आसान होगी।

    मशरूम और उन्नत सब्जी बेल्ट

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    सोनीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र पानीपत, अंबाला जिले पहले से ही मशरूम उत्पादन में देश में अग्रणी हैं। यहां नियंत्रित वातावरण और वर्टिकल रैक प्रणालियों का विस्तार करके कम से कम जगह में मशरूम और बेमौसम सब्जियों का उत्पादन कई गुना बढ़ाया जाएगा।

    आलू और बीज बेल्ट

    कुरुक्षेत्र, करनाल में एमएचयू और शामगढ़ में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र के आसपास का क्षेत्र एरोपोनिक्स तकनीक का हब बनेगा। यहां बिना मिट्टी और हवा में लटकती जड़ों के माध्यम से आलू के उच्च गुणवत्ता वाले, वायरस-मुक्त मिनी-ट्यूबर (बीज) तैयार किए जाएंगे।

    किसानों को यह होगा लाभ

    पारंपरिक खेती की तुलना में स्मार्ट बागवानी किसानों के लिए आर्थिक और व्यावहारिक रूप से गेम-चेंजर साबित होने वाली है। हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स तकनीकों में 85 से 95 प्रतिशत तक कम पानी की आवश्यकता होती है। पानी की बूंद-बूंद का सीधा उपयोग पौधों की जड़ों तक पोषक तत्व पहुंचाने में होता है, जिससे गिरते भूजल स्तर वाले जिलों के किसानों के लिए खेती जारी रखना संभव होगा।

    ऐसे कारगर साबित होगी यह तकनीक

    पूरी दुनिया आज क्लाइमेट चेंज से जूझ रही है। तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि और अनियमित वर्षा के दौर में पारंपरिक फसलें दम तोड़ रही हैं। भविष्य में केवल वही तकनीकें टिक पाएंगी जो पर्यावरण के अनुसार खुद को ढाल सकें। स्मार्ट बागवानी कंप्यूटर और सेंसर आधारित तापमान नियंत्रण के कारण भविष्य की खाद्य सुरक्षा की गारंटी बनेगी।

    वैश्विक निर्यात और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा देखनी होगी

    प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया स्मार्ट बागवानी का रोड मैप दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणादायी है। यूरोपीय संघ और मिडल ईस्ट के देश अब केवल उन्हीं कृषि उत्पादों को आयात करते हैं जो रोगमुक्त और ट्रेसेबल जिसका उत्पादन स्रोत स्पष्ट हो। हरियाणा की कोल्ड चेन नीति और एफपीओ क्लस्टर्स के माध्यम से जब इन एक हजार एकड़ से निर्यात गुणवत्ता की सब्जियां और फल निकलेंगे, तो भारत वैश्विक बागवानी बाजार में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा। -डॉ. संजय कुमार, चेयरमैन, एसआरबी नई दिल्ली।