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    Haryana SIR: करनाल में मतदाता सूची में बड़ी कटौती, पांचों सीटों पर बदलेंगे सियासी समीकरण

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 09:43 PM (IST)

    करनाल जिले की पांच विधानसभा सीटों से विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 2.10 लाख से अधिक मतदाता हटाए गए हैं। इस बड़े बदलाव से आगामी चुनावों में राजनीतिक समीकर ...और पढ़ें

    करनाल में मतदाता सूची का नया गणित, सियासी दलों की बढ़ाएगा चुनौती।

    करनाल में मतदाता सूची का नया गणित, सियासी दलों की बढ़ाएगा चुनौती।

    HighLights

    1. करनाल में 2.10 लाख से अधिक मतदाता सूची से बाहर।

    2. पांचों विधानसभा सीटों पर बदलेगा आगामी चुनावी समीकरण।

    3. राजनीतिक दल बूथ स्तर पर कर रहे गहन विश्लेषण।

    अश्विनी शर्मा, करनाल। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद करनाल की पांचों विधानसभा सीट पर नया चुनावी गणित उभरकर सामने आया है। जिले की पांच विधानसभा सीटों से दो लाख 10 हजार 592 मतदाता विभिन्न कारणों से सूची से बाहर पाए गए हैं। ऐसे में अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी इन आंकड़ों की गूंज सुनाई देने लगी है। सत्तापक्ष हो या विपक्ष, सभी दल अब संशोधित मतदाता सूची का गहराई से विश्लेषण करने में जुट गए हैं।

    एसआईआर से पहले करनाल, घरौंडा, असंध, इंद्री और नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्रों में 12 लाख 25 हजार 661 मतदाता थे। प्रारंभिक पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर 10 लाख 15 हजार 69 रह गई है। हटाए गए मतदाताओं में 46 हजार 220 अनुपस्थित, 95 हजार 172 स्थायी रूप से स्थानांतरित, 53 हजार 528 मृतक, 12 हजार 980 अन्य स्थान पर पहले से पंजीकृत तथा 2692 अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं।

    राजनीतिक दृष्टि से सबसे अधिक चर्चा करनाल विधानसभा को लेकर है। यहां अकेले 87 हजार 63 मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। यही वह सीट है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के जगमोहन आनंद ने कांग्रेस की सुमिता सिंह को 33 हजार 652 मतों से हराया था। अब इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के हटने के बाद सभी दल बूथ स्तर पर नए सिरे से समीकरण बैठाने में जुटेंगे।

    असंध विधानसभा की तस्वीर सबसे अधिक दिलचस्प मानी जा रही है। पिछले चुनाव में भाजपा के योगेंद्र सिंह राणा ने कांग्रेस के शमशेर सिंह गोगी को केवल 2306 मतों से हराया था। जबकि एसआईआर में यहां 34 हजार 961 मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। जीत का अंतर और हटे मतदाताओं की संख्या की तुलना राजनीतिक दलों को नए सिरे से रणनीति बनाने पर मजबूर कर रही है। यही कारण है कि असंध को भविष्य की सबसे संवेदनशील सीटों में गिना जा रहा है।

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    घरौंडा विधानसभा में भी भाजपा के हरविंद्र कल्याण ने कांग्रेस के वीरेंद्र सिंह राठौर को 4531 मतों से मात दी थी। यहां 33 हजार 524 मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर भी मतदाता सूची में बदलाव भविष्य के चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।

    नीलोखेड़ी में भाजपा के भगवान दास ने 18 हजार 845 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। यहां 29 हजार 62 मतदाता हटाए गए हैं। वहीं इंद्री विधानसभा में भाजपा के रामकुमार कश्यप को पिछले चुनाव में लगभग 15 हजार से अधिक मतों की बढ़त मिली थी। यहां 25 हजार 982 मतदाता सूची से बाहर पाए गए हैं।

    हालांकि, हटाए गए मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। फिर भी राजनीतिक दल केवल कुल संख्या नहीं देख रहे, बल्कि यह जानने में जुटे हैं कि किन बूथों और किन क्षेत्रों में मतदाता सूची में सबसे अधिक बदलाव हुआ है।

    यही आंकड़े आगामी चुनावों की रणनीति तय करेंगे। एसआईआर की प्रक्रिया अभी दावे और आपत्तियों के चरण से गुजर रही है। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक आंकड़ों में बदलाव संभव है। लेकिन इतना तय है कि करनाल जिले की राजनीति में अब चर्चा विकास से अधिक मतदाता सूची के नए गणित की होने लगी है।