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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 27, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Stumble Burning: पराली की आग से पर्यावरण ही नहीं जमीन का भी विनाश, मित्र कीट हो रहे विलुप्त

    Updated: Sun, 27 Oct 2024 01:21 PM (IST)

    पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है बल्कि जमीन भी बंजर होती जा रही है। मित्र कीट जल जाते हैं और भूमि की उर्वरता घट रही है। सरकार पराली ...और पढ़ें

    पराली जलाने से बंजर हो रही जमीन
    पराली जलाने से बंजर हो रही जमीन

    HighLights

    1. जमीन की 20% तक उर्वरा शक्ति हो जाती है कम।
    2. बिना गोबर खाद के नहीं बनते मित्र कीट।
    3. पराली जलाने से बढ़ जाती 1000 रुपये प्रति एकड़ की लागत।

    कपिल पूनिया, करनाल। पराली की आग। यह पर्यावरण ही नहीं, जमीन के विनाश की आग है। इस आग से केवल पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचता है, बल्कि जमीन बांझपन की ओर बढ़ती है। मित्र कीट जल जाते हैं। एक बार जल जाने के बाद इन्हें जन्म देना टेढ़ी खीर है।

    मित्र कीटों को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खाद की जरूरत होती है। फसल अवशेष जलाने के बाद किसान पैदावार बढ़ाने के लिए रसायनों का प्रयोग करते हैं। जिस कारण मित्र कीट जमीन से विलुप्त होते जा रहे हैं। इससे भूमि की उर्वर क्षमता घट रही है और बेहतर पैदावार के लिए रसायन पर निर्भरता बढ़ रही है। इससे फसल की गुणवत्ता घटती है और किसान की लागत बढ़ती है।

    इन मित्र कीटों को हो रहा नुकसान

    • ट्राइकोग्रामा बहुत छोटे आकार का एक मित्र कीट है, जिन्हें खेतों में आसानी से देख पाना कठिन है। यह एक प्रकार का अंड-परजीवी मित्र कीट है, जो शत्रु कीट के अंडों में अपना अंडा डालकर उन्हें अंडावस्था में ही नष्ट कर देते है और शत्रु कीट के अंडे से इनका (मित्र कीट ट्राइकोग्रामा) का वयस्क बाहर आता है। वह दोबारा शत्रु कीट में अपना अंडा देता है। इनका जीवन चक्र बहुत छोटा होता है तथा एक फसल अवधि में इसकी अनेक पीढ़ियां आ जाती हैं। इस प्रकार इनकी संख्या शत्रु कीट की तुलना में कई गुणा बढ़ जाती है तथा शत्रु कीट अंडों को नष्ट करता रहता है।
    • नेबिस एक परभक्षी कीट है, जो शत्रु कीटों को पकड़कर खाता है। इससे उनकी संख्या में कमी आ जाती है।
    • जिओकारिसएक परभक्षी कीट है, जो रसचूसक कीटों को नष्ट करता है
    • मकड़ी की कई प्रजातियां खेती में पायी जाती हैं, जो विभिन्न प्रकार के हानिकारक कीटों को परभक्षी के रूप में पकड़ कर नष्ट करती हैं।
    • ओरियस भी एक परभक्षी कीट है, जो रसचूसक कीटों को नष्ट करता है।
    • टेट्रास्टिकस यह एक प्रकार का प्यूपा परजीवी कीट है, जो दूसरे शत्रु कीटों के प्यूपा को नष्ट करता है।
    • सिरफिड मक्खी, जो रसचूसक कीट माहू खा जाती है।
    • सिक्षिसडेला एक परभक्षी कीट है, यह धान गंधी जैसे कीटों को नष्ट करता है।
    • वास्प की कई प्रजातियां मित्र कीट के रूम में कार्य करता है। यह शत्रु कीट के अंडे, प्यूपा, लारवा एवं व्यस्कों को नष्ट करती है।
    • ब्रैकान परभक्षी कीट जो विभिन्न प्रकार के कीटों को नष्ट करता है।

    गोबर और ग्रीन खाद से बनते हैं मित्र कीट

    गोबर और ग्रीन खाद से ही मिट्टी में मित्र कीट बनते हैं। अब किसान फसल अवशेष जलाने के बाद रसायनों का प्रयोग कर रहा है। आग और रसायन के कारण मित्र कीट मिट्टी से विलुप्त होते जा रहे हैं। मिट्टी में मित्र कीटों की संख्या बढ़ाने के लिए फसल अवशेष में आग लगाने से बचने के साथ फसल बुवाई से पहले ग्रीन और प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल जरूरी है।

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    पराली प्रबंधन पर दिया जा रहा अनुदान

    इस प्रकार किसान प्रति एकड़ फसल अवशेष जलाने पर करीब 500 रुपये मूल्य के पोषक तत्व कम कर रहा है और दूसरी फसल की पैदावार अच्छी लेने के लिए 500 रुपये ही प्रति एकड़ अधिक लागत लगा रहा है। इस प्रकार फसल अवशेष जलाने से किसान की प्रति एकड़ एक 1000 रुपये की लागत बढ़ रही है।

    वहीं पराली प्रबंधन करके किसान वायू को प्रदूषित होने से बचाने के साथ प्रति एकड़ करीब 4840 रुपये अतिरिक्त कमा सकता है। इसके साथ सरकार की ओर से भी पराली प्रबंधन पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

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