'पापा सिस्टम से हिम्मत हार गए...', करनाल में एसई गीतू राम की आत्महत्या मामले में बेटी ने लगाया जातिगत उत्पीड़न का आरोप
एसई गीतू राम की बेटी नीति ने आरोप लगाया है कि उनके पिता को जातिगत भेदभाव और विभागीय उत्पीड़न के कारण आत्महत्या करनी पड़ी।

करनाल में एसई गीतू राम की आत्महत्या, बेटी ने जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाया।
HighLights
बेटी ने पिता की आत्महत्या का कारण जातिगत उत्पीड़न बताया
सुसाइड नोट में कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए
परिवार ने पिता के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया
जागरण संवाददाता, करनाल। वीडियो वायरल होने के बाद कई माह से पापा बहुत परेशान थे, लेकिन उन्हें कानून पर विश्वास था। वे हमेशा कहते थे कि कानून मुझे बचाएगा। मैं हमेशा लिखे गए पत्र स्वयं उनके साथ बैठकर लिखती थी, ये अंतिम पत्र भी पापा ने मुझसे लिखवाया था और कहा कि था बेटी ये विभाग को अंतिम पत्र है, ताकि न्याय मिल सके।
पापा विभाग के रवैये के सामने हिम्मत हार गए। अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में भी वे हमें संदेश देकर गए हैं कि कानून के दायरे में रहकर काम करना। हम पापा की लड़ाई लड़ेंगे और न्याय लेकर रहेंगे।
यह शब्द एसई गीतू राम की बेटी नीति ने रोते हुए कहे। बेटी ने आरोप लगाए कि पापा के साथ जो अधिकारी थे, वह उनकी जाति के कारण परेशान कर रहे थे। वह अनुसूचित जाति समाज से हैं, इसलिए दूसरी जाति के निचले अधिकारी भी पापा को अपना बास तक नहीं मानते थे।
उन्हें जातिसूचक शब्द बोलते थे। उन्होंने इसकी शिकायत भी की थी। इन्हीं अधिकारियों ने पापा की एक पुरानी वीडियो को एडिट कर एक समाज को भड़काने के लिए जारी कर दी।
बेटी का दावा है कि उसके पापा के साथ के लोगों ने पहले हंसी मजाक में वह शब्द बुलवाए जो वीडियो में थे, फिर उसे प्रसारित कर दिया। इस कारण पिता को विभाग ने सस्पेंड कर दिया था। यही लड़ाई लड़ रहे थे।
किसी अधिकारी ने उनकी नहीं सुनी और न ही उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। हमारे पापा बेकसूर थे। वह किसी को गलत नहीं बोलते थे। वह हंसी मजाक वाले व्यक्ति थे। वह 58 साल के हुए थे।
बेटी-पत्नी को कई दिनों से दे रहे थे दस्तावेजों की जानकारी
बेटी ने बताया कि उसके पापा कभी नहीं बताते थे कौन सी चीज कहां रखी है, लेकिन कुछ दिनों से वह अपने सभी दस्तावेजों की जानकारी दे रहे थे। बता रहे थे कि यह फाइलें यहां रखी हैं और इन फाइलों में ये ये दस्तावेज हैं।
बेटी ने रोते हुए बताया कि पापा ने बड़ी संख्या में पत्र लिखे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा था कि उनके मामले की निष्पक्ष जांच कराए और एमडी को भी कई पत्र लिखे हैं।
आरटीआई में भी नहीं दिए दस्तावेज
सुसाइड नोट में लिखा गया कि असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा मुझे ही निलंबित कर बिना जांच के आधारहीन चार्जशीट थमा दी गई। उनके सेवा रिकॉर्ड और आरटीआई से मांगी गई जानकारियों को भी नहीं दिया गया। 15 साल के सेवाकाल के बाद भी न तो बहाल किया गया और न ही सेवानिवृत्ति के वैध लाभ जारी किए गए।
लिखा- मेरे सुसाइड के लिए नीचे से लेकर एमडी तक जिम्मेदार
'इंजीनियर रणबीर देशवाल (एक्सईएन), इंजीनियर अश्विनी कौशिक (एक्सईएन), इंजीनियर सतीश गोयत (एसडीओ), इंजीनियर प्रदीप (एसडीओ) पिछले कोर्ट केस के कारण मुझसे गहरी रंजिश रखते हैं।
कोर्ट केस के बाद ये अधिकारी मुझे अपना अफसर नहीं मानते हैं और खुले तौर पर जातिसूचक टिप्पणियों का प्रयोग करते हैं। मेरे निर्देशों की अवहेलना करते हैं। इंजीनियर मनिंदर सिंह (एसई) और मोहित भटनागर (अंडर सेक्रेटरी) भी उन्हीं का खुले तौर पर समर्थन करते हैं।
मैं हरियाणा सरकार से अनुरोध करता हूं कि निष्पक्ष जांच के लिए इन अधिकारियों को पुलिस हिरासत में लिया जाए। इंजीनियर राज सिंह (एक्सईएन), आशीष महल (एसडीओ) और रूपेश (एसडीओ) भी जातिगत कारण से पीछे के दरवाजे से उनका समर्थन करते हैं। मेरे सुसाइड के लिए ये सभी अधिकारी और एमडी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।'
घर में मातम, आज इकट्ठा हो सकते हैं समाज के लोग
एसई की गीतू राम की मौत की सूचना मिलने के बाद पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बड़ी संख्या में अनुसूचित समाज के लोग और परिचित लोग जमा हो गए। घर पर दिनभर लोगों की आवाजाही रही। पत्नी और बेटियों और बेटे का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मंगलवार को समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होंगे।
