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नूंह में सरकारी खरीद के इंतजार में किसान, औने-पौने दामों पर बाजरा बेचने को मजबूर

Published: Mon, 05 Oct 2026 06:00 PM (IST)

नूंह के अनाज मंडी तावड़ू में बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा ...और पढ़ें

सरकारी खरीद के इंतजार में किसान ( एआई जेनरेटेड)

सरकारी खरीद के इंतजार में किसान ( एआई जेनरेटेड)

संवाद सहयोगी, तावड़ू। अनाज मंडी तावड़ू में बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। मंडी में क्षेत्रभर से अलग-अलग गांवों के किसान बड़ी संख्या में किसान बाजरे की फसल लेकर पहुंच रहे हैं।

सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा लापरवाही का नतीजा 

किसानों का आरोप है कि डीएम हैफेड धर्मेंद्र की लापरवाही का खामियाजा सीधे अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। मंडी में बाजरे से भरे ट्रैक्टर-ट्रालियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

किसान अपनी फसल लेकर कई-कई घंटे मंडी में खड़े रहने को मजबूर हैं। दूसरी ओर पोर्टल पर फसल का वेरिफिकेशन और गेट पास कटने में आ रही दिक्कतों ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।

मंडी में बाजरे की फसल लेकर पहुंचे किसान बलजीत सिंह, अतुल सहरावत, धर्मपाल, राजेंद्र, दीन मोहम्मद का कहना है कि जब सरकारी खरीद की व्यवस्था समय पर शुरू नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरी में व्यापारियों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है।

खरीद प्रक्रिया सुचारू नहीं होने से किसानों में रोष

तावड़ू मंडी में इस बार बाजरे की सबसे अधिक आवक हुई है। इसके बावजूद खरीद प्रक्रिया सुचारु नहीं होने से किसानों में रोष है।

किसानों का कहना है कि सरकार ने एक अक्टूबर से बाजरे की सरकारी खरीद और भावांतर भरपाई योजना को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन, जमीनी स्तर पर ये दावे फिलहाल केवल घोषणा साबित हो रहे हैं। किसानों को न तो समय पर सरकारी खरीद का लाभ मिल रहा है और न ही भावांतर भरपाई योजना का भरोसा दिखाई दे रहा है।

व्यवस्था नहीं सुधरी तो आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है : किसान

किसानों ने सरकार और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मंडी में तत्काल सरकारी खरीद शुरू कराई जाए। पोर्टल संबंधी समस्याओं को दूर कर गेट पास जारी किए जाएं और किसानों की फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए। किसानों का कहना है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ सकती है।

बता दें कि रविवार को भी उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी आफताब अहमद ने भी मंडी का निरीक्षण किया था, उसने भी सरकार को घेरते हुए सीधे शब्दों में कहा कि जो किसान छह महीने मेहनत करके अपनी फसल तैयार करते हैं, उनको उनकी मेहनत का फल मिलना चाहिए।

फसल खरीद और गेट पास की समस्याओं को लेकर डीएम हैफेड धर्मेंद्र से बार-बार संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन, वह भी सवालों से बचते नजर आए।

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