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हरियाणा सरकार का समर्थन करना पड़ा भारी, कांग्रेस MLA जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस; सदस्यता हो सकती है रद

Published: Wed, 16 Sep 2026 12:51 PM (IST)

कांग्रेस विधायक जरनैल सिंह को पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने और विधानसभा में सत्ता पक्ष का समर्थन करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

कांग्रेस विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी (फाइल फोटो)

कांग्रेस विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पार्टी व्हिप उल्लंघन और सदन में अनुशासनहीनता पर नोटिस जारी।

  2. सत्ता पक्ष का समर्थन, अपनी पार्टी के खिलाफ नारेबाजी का आरोप।

  3. 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का खतरा; 30 दिन में जवाब।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र (27 अगस्त से 1 सितंबर, 2026) के दौरान पार्टी निर्देशों का उल्लंघन करने और सदन के भीतर अनुशासनहीनता बरतने के मामले में कांग्रेस विधायक दल ने कड़ा रुख अपनाया है।

कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक भारत भूषण बत्तरा ने रतिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद् करने की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

व्हिप लेने से इनकार और सत्ता पक्ष के साथ नारेबाजी का आरोप

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल द्वारा लाए गए काम रोको प्रस्ताव (Adjournment Motion) के समर्थन के लिए तीन-पंक्ति का व्हिप जारी किया गया था।

आरोप है कि विधायक जरनैल सिंह ने सचेतक इन्दुराज नरवाल द्वारा दिए जा रहे नोटिस की प्राप्ति स्वीकार करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। इसके अलावा, जब सदन में काम रोको प्रस्ताव पर समर्थन की बात आई, तो वे पार्टी निर्देश के अनुसार खड़े नहीं हुए।

इसके साथ ही, उपलब्ध फोटो और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि विधायक ने सदन के अंदर पोस्टर/प्लैकार्ड प्रदर्शित किए और सत्ता पक्ष की ओर जाकर हरियाणा सरकार के मंत्रियों, श्री कृष्ण बेदी और श्री गौरव गौतम तथा अन्य सत्ताधारी विधायकों के साथ मिलकर अपनी ही पार्टी और विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी में भाग लिया।

30 दिनों के भीतर मांगा गया बिंदुवार स्पष्टीकरण

मुख्य सचेतक भारत भूषण बत्तरा ने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से त्यागना केवल लिखित इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायक का आचरण और सार्वजनिक गतिविधियां भी इस बात का आधार बनती हैं।

विधायक जरनैल सिंह को इस नोटिस का 17 प्रमुख बिंदुओं पर लिखित और साक्ष्यों सहित उत्तर देने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा दी गई है।

यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो सक्षम प्राधिकारी के समक्ष संविधान की 10वीं अनुसूची के अंतर्गत उनकी अयोग्यता (Disqualification) की याचिका/कार्रवाई दायर कर दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि विधायक जरनैल सिंह को राज्यसभा चुनाव 2026 के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पहले भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जा चुका है।