मोटर दुर्घटना मुआवजा तय करते समय फैमिली पेंशन की नहीं होगी कटौती, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना में फैमिली पेंशन नहीं घटाई जा सकती। अदालत ने कहा कि फैमिली पेंशन कर्मचारी ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला। सांकेतिक फोटो
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में मुआवजे की गणना करते समय मृतक के आश्रितों को मिलने वाली फैमिली पेंशन को घटाया नहीं जा सकता।
अदालत ने कहा कि फैमिली पेंशन कर्मचारी की सेवा के दौरान अर्जित लाभ है, जिसका दुर्घटना से मिलने वाले मुआवजे से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, इसलिए इसे आर्थिक लाभ मानकर मुआवजे से कम करना कानूनन गलत है।
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की अदालत ने दावेदारों की अपील स्वीकार करते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें मृतक के आश्रितों को मिलने वाली फैमिली पेंशन को आय में शामिल कर मुआवजा कम कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसा करना न केवल स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि इससे दोषी पक्ष को अनुचित लाभ मिलता है।
हादसे में हुई थी कहर सिंह की मौत
मामला वर्ष 2016 में पंचकूला में हुई सड़क दुर्घटना से संबंधित था, जिसमें केहर सिंह की मृत्यु हो गई थी। आश्रितों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा दायर किया था।
अधिकरण ने मृतक की आय का आकलन करते समय उनकी पत्नी को मिलने वाली लगभग 24 हजार रुपये मासिक फैमिली पेंशन को ध्यान में रखते हुए निर्भरता हानि की गणना कम कर दी थी और कुल 3.22 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था।
दावेदारों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर तर्क दिया कि फैमिली पेंशन मृतक की सेवा का अर्जित अधिकार है, जो मृत्यु के कारण चाहे जो भी हो, आश्रितों को मिलती ही है। इसलिए इसे दुर्घटना से मिलने वाले मुआवजे से घटाना सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों के विपरीत है।
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अदालत के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के हेलन सी रेबेलो, सरला वर्मा तथा प्रणय सेठी सहित कई फैसलों का हवाला दिया गया।हाई कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद कहा कि फैमिली पेंशन और दुर्घटना मुआवजा दो अलग-अलग आधारों पर मिलने वाले लाभ हैं।
कुल मुआवजा 11.58 लाख रुपये निर्धारित
यदि फैमिली पेंशन को घटाया जाता है तो इसका अर्थ होगा कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार पक्ष को मृतक की सेवा से जुड़े लाभों का अप्रत्यक्ष फायदा मिल रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने मृतक की मासिक आय 24 हजार रुपये मानते हुए, व्यक्तिगत खर्चों की कटौती और लागू गुणांक के आधार पर मुआवजे की पुनर्गणना की तथा पारंपरिक मदों में भी वृद्धि की।
इसके बाद कुल मुआवजा 11.58 लाख रुपये निर्धारित किया गया, जो अधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे से 8.36 लाख रुपये अधिक है। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह बढ़ी हुई राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर अधिकरण में जमा कराए, जिसके बाद यह राशि पहले से तय अनुपात में दावेदारों को वितरित की जाएगी।