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    'ऑक्सीजन नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी मदद नहीं करेगा', गुरुग्राम मेट्रो विस्तार के लिए पेड़ों की कटाई पर HCF सख्त

    Updated: Thu, 21 May 2026 03:42 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम मेट्रो विस्तार के लिए पेड़ों की कटाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध कटाई ...और पढ़ें

    गुरुग्राम मेट्रो विस्तार: हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर जताई कड़ी आपत्ति।

    गुरुग्राम मेट्रो विस्तार: हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर जताई कड़ी आपत्ति।

    HighLights

    1. विकास परियोजनाओं में अंधाधुंध पेड़ कटाई अस्वीकार्य

    2. गुरुग्राम मेट्रो विस्तार हेतु न्यूनतम पेड़ काटने के निर्देश

    3. पौधारोपण की मासिक रिपोर्ट, 5 किमी दायरे में अनिवार्य

    दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी 'यदि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन ही नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी आपकी मदद नहीं करेगा।'

    दरअसल गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए 489 और पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। कंपनी ने अदालत को बताया कि इससे पहले करीब 1700 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जा चुकी है और बदले में 7300 पौधे लगाए गए हैं।

    जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि यह लगभग 28 किलोमीटर लंबी मेट्रो विस्तार परियोजना है, जिसकी लागत 5000 करोड़ रुपये से बढ़कर 7000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक से वित्तीय सहायता पर बातचीत चल रही है और यदि समय पर कार्य नहीं हुआ तो यह सहायता प्रभावित हो सकती है। कंपनी ने दलील दी कि गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है।

    हालांकि अदालत ने पूछा कि जब मेट्रो का ट्रैक एलिवेटेड है और पिलर सीमित जगह लेते हैं तो फिर इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत क्यों है। अदालत ने निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ों की कटाई की जाए। साथ ही संबंधित डीएफओ को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए कि 489 प्रस्तावित पेड़ों में से जितने अधिक संभव हों, उन्हें बचाया जाए ताकि क्षेत्र में हरित आवरण बना रहे।

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    जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि मेट्रो के एलिवेटेड स्टेशन, पिलर और डिपो निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई जरूरी है। कंपनी ने दावा किया कि वह “एक के बदले दस” के अनुपात में पौधारोपण कर रही है और अब तक 7300 पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनकी “100 प्रतिशत सर्वाइवल रेट” है। यह पौधा रोपण केएमपी हाईवे के पास लगभग 21 किलोमीटर दूर किया गया है।

    इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अदालत पहले ही कह चुकी है कि प्रतिपूरक पौधरोपण यथासंभव पांच किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि शहर को “कंक्रीट जंगल” बनने से बचाया जाए।

    हालांकि अदालत ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व और सार्वजनिक हित को देखते हुए सशर्त राहत देते हुए 489 पेड़ों की कटाई पर लगी रोक में आंशिक ढील दे दी। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ काटे जाएं और जिन पेड़ों को बचाया जा सकता है, उन्हें हर हाल में संरक्षित किया जाए।

    अदालत ने जीएमआरएल को पहले किए गए वनीकरण कार्य की मासिक सर्वाइवल रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई गई या समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो मामले को स्वत सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाएगी।