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सोनीपत में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा हुआ ₹1.28 करोड़ प्रति एकड़, हाई कोर्ट का फैसला

Published: Sat, 26 Sep 2026 01:54 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोनीपत के राठधना गांव में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बढ़ाकर ...और पढ़ें

सोनीपत में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा हुआ ₹1.28 करोड़ प्रति एकड़ (फाइल फोटो)

सोनीपत में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा हुआ ₹1.28 करोड़ प्रति एकड़ (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सोनीपत के राठधना गांव में भूमि अधिग्रहण मुआवजा बढ़ा

  2. मुआवजा 1.29 करोड़ रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया

  3. हाई कोर्ट ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार की

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोनीपत के राठधना गांव में सेक्टर-32 और 33 के बीच सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित 23.77 एकड़ जमीन का मुआवजा बढ़ाकर एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ कर दिया है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार की संबंधित अपीलों को खारिज कर दिया।

राज्य सरकार ने 13 अप्रैल 2010 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत राठधना गांव की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद 11 अप्रैल 2011 को धारा छह के तहत अधिसूचना जारी की गई। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 15 मार्च 2013 को जमीन का बाजार मूल्य 80 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था। इससे असंतुष्ट जमीन मालिकों ने धारा 18 के तहत रेफरेंस कोर्ट का रुख किया। रेफरेंस कोर्ट ने 17 अगस्त 2019 को मुआवजा बढ़ाकर 86 लाख 60 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दिया था।

इसके बाद जमीन मालिकों और राज्य सरकार दोनों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। जमीन मालिकों की ओर से दलील दी गई कि इसी गांव और आसपास की जमीन को लेकर लगभग इसी अवधि में जारी एक अन्य अधिग्रहण अधिसूचना के मामले में हाई कोर्ट पहले ही जमीन का बाजार मूल्य एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ तय कर चुका है। उस मामले में 30 अप्रैल 2008 की बिक्री विलेख को भी आधार बनाया गया था। हाई कोर्ट ने पाया कि उस बिक्री विलेख में शामिल जमीन वर्तमान अधिग्रहित भूमि से करीब छह एकड़ की दूरी पर थी, जबकि जिस बिक्री विलेख पर राज्य सरकार भरोसा कर रही थी, उसे आधार बनाने से पहले ही इसी क्षेत्र और समान उद्देश्य वाले अधिग्रहण के मामले में हाई कोर्ट बाजार मूल्य निर्धारित कर चुका था।

अदालत ने कहा कि दोनों अधिग्रहण लगभग एक ही समय में हुए और दोनों का उद्देश्य सेक्टर सड़क का निर्माण था। ऐसे में समान परिस्थितियों वाली जमीन के लिए अलग बाजार मूल्य निर्धारित करने का कोई उचित आधार नहीं है। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि पहले निर्धारित किए गए एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ के बाजार मूल्य को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई 2024 को खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में भी उसी दर को लागू किया जाना उचित है।

इसके साथ ही अदालत ने राठधना गांव की अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित करते हुए जमीन मालिकों की अपील मंजूर कर लीं और हरियाणा सरकार की अपीलें खारिज कर दीं। जमीन मालिकों को निर्धारित बाजार मूल्य के अलावा भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले वैधानिक लाभ भी प्राप्त होंगे।