हरियाणा में आधे-अधूरे चल रहे एसटीपी, 903 करोड़ का जुर्माना वसूलने में बोर्ड नाकाम; CAG रिपोर्ट का खुलासा
हरियाणा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) आधी-अधूरी क्षमता से चल रहे हैं, जिससे घरेलू सीवेज का केवल 51% ही मानकों के अनुरूप उपचारित हो रहा है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।
HighLights
हरियाणा में एसटीपी आधी-अधूरी क्षमता से काम कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 903 करोड़ का जुर्माना वसूलने में विफल।
कैग रिपोर्ट ने सीवेज प्रबंधन की खामियां उजागर कीं।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) आधी-अधूरी क्षमता के साथ चल रहे हैं। वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, अंबाला, यमुनानगर और पानीपत सहित आठ जिलों में 1523 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) घरेलू सीवेज में सिर्फ 51 प्रतिशत का डिस्चार्ज ही मानकों के अनुरूप हो सका।
इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने वाले विभागों और एजेंसियों पर 903 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने से चूक गया।
जिन 650 औद्योगिक इकाइयों पर 264 करोड़ का रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया था, उनमें से भी 334 इकाइयों से सिर्फ 50 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खामियां सामने आई हैं।
फरीदाबाद शहर में 92 एमएलडी सीवेज ही एसटीपी तक पहुंचा
गुरुग्राम (उत्तर) में 92.52 प्रतिशत, बल्लभगढ़ में 81.50 प्रतिशत और सोनीपत में 78.83 प्रतिशत पर्यावरणीय मुआवजा वसूली के लिए लंबित था। रिपोर्ट के मुताबिक फरीदाबाद शहर में 282 एमएलडी घरेलू सीवेज की तुलना में 97.5 एमएलडी (34.57 प्रतिशत) स्थापित सीवेज उपचार क्षमता है, जबकि 92 एमएलडी सीवेज ही एसटीपी तक पहुंच रहा था।
यमुना नदी में मुख्य नाले (बुढिया नाला) के माध्यम से फरीदाबाद जिले के डिस्चार्ज में औसत जैविक ऑक्सीजन मांग स्तर 139 मिलीग्राम/लीटर (10 मिलीग्राम/लीटर के मानक के विरुद्ध) और औसत फिकलकोलीफार्म स्तर 7.891 एमपीएन/100 मिलीलीटर (100 एमपीएन/मिलीलीटर के मानक के विरुद्ध) दर्ज किया गया।
कनेक्टिंग सीवर लाइन के निर्माण के लिए समय पर वन मंजूरी नहीं लेने से एसटीपी के निर्माण और अपडेटेशन के काम में पांच वर्ष से अधिक का विलंब हुआ।
मिर्जापुर और प्रतापगढ़ में दो एमपीएस (79.49 करोड़) और दो एसटीपी (196.55 करोड़) भी तीन साल व्यर्थ पड़े रहे। फरीदाबाद के शिव दुर्गा विहार, लक्कड़पुर और दयालपुर में सीवरेज प्रणाली के सुदृढ़ीकरण का कार्य जुलाई 2018 तक पूर्ण होना निर्धारित था, लेकिन अक्टूबर 2025 तक भी नगर निगम द्वारा एसटीपी के लिए स्थान को अंतिम रूप नहीं देने के कारण इसे पूर्ण नहीं किया जा सका। इसके परिणामस्वरूप 16.35 करोड़ रुपये खर्चने के बावजूद सीवरेज प्रणाली का सुदृढ़ीकरण नहीं किया जा सका।
गुरुग्राम से यमुना नदी में पहुंच रहा "जहरीला" पानी
गुरुग्राम में मार्च 2024 तक 550 एमएलडी घरेलू सीवेज उत्पन्न हुआ था, जिसमें से 90 एमएलडी का उपचार/पुन उपयोग कालोनाइजरों द्वारा किया गया। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के पास 460 एमएलडी की आवश्यकता की तुलना में 415 एमएलडी की स्थापित सीवेज उपचार क्षमता थी। इन सीवेज उपचार संयंत्रों पर प्राप्त होने वाला औसत दैनिक सीवेज केवल 397 एमएलडी था।
जिले के 16 सीवेज उपचार संयंत्रों में से 12 सीवेज उपचार संयंत्र अपशिष्ट जल डिस्चार्ज के मानकों को पूरा कर रहे थे। गुरुग्राम से निकलने वाला अपशिष्ट जल तीन मुख्य नालों के माध्यम से यमुना नदी में मिलता है।
जो कि निर्धारित मानदंडों से बहुत अधिक था। मानेसर में 25 एमएलडी क्षमता के एसटीपी के निर्माण में चार वर्ष की देरी के कारण नाहरपुर-कासन और मानेसर शहर के अपशिष्ट जल को लंबे समय तक नालों/खुले मैदान में बहाया गया।
सोनीपत में अधूरे पड़े कई प्रोजेक्ट
सोनीपत में 78.42 एमएलडी घरेलू सीवेज के लिए 85.3 एमएलडी क्षमता के सात एसटीपी हैं, जबकि इन एसटीपी में केवल 60.50 एमएलडी सीवेज ही पहुंच पाया। सात एसटीपी में से छह डिस्चार्ज मानकों को पूरा कर रहे थे।
ॉसोनीपत से दो मुख्य नालों (ड्रेन नंबर 6 और 8) से यमुना नदी में होने वाले अपशिष्ट जल डिस्चार्ज में औसत जैविक आक्सीजन मांग (96 मिलीग्राम/लीटर एवं 18 मिलीग्राम/लीटर) और फिकलकोलीफार्म स्तर (3.233 एमपीएन/100 मिलीलीटर एवं 35,373 एमपीएन/100 मिलीलीटर) दर्ज किया गया, जो निर्धारित मानकों से बहुत अधिक था। काकरोई में 36 करोड़ से बनने वाले 25 एमएलडी क्षमता का एसटीपी छह वर्ष तक पूर्ण क्षमता से संचालित नहीं किया जा सका, जिससे ड्रेन नंबर 6 में अनुपचारित सीवेज का बहाव लगातार जारी रहा।
