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    हरियाणा टीजीटी भर्ती में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, उच्च योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी नहीं होंगे अयोग्य

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 04:15 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने टीजीटी संस्कृत और साइंस भर्ती मामले में फैसला सुनाया है कि निर्धारित न्यूनतम योग्यता से अधिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी ...और पढ़ें

    हरियाणा टीजीटी भर्ती में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला (File Photo)

    हरियाणा टीजीटी भर्ती में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला (File Photo)

    HighLights

    1. उच्च योग्यता वाले अभ्यर्थी टीजीटी भर्ती से बाहर नहीं

    2. हाई कोर्ट ने टीजीटी संस्कृत, साइंस अभ्यर्थियों को दी राहत

    3. एचएसएससी को चार सप्ताह में नियुक्ति पर विचार का निर्देश

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) की टीजीटी संस्कृत और टीजीटी साइंस भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि निर्धारित न्यूनतम योग्यता से अधिक, उसके विषय में उच्च योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि समान विषय में उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवार को अयोग्य ठहराना कानूनन उचित नहीं है।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने मनीष कुमार और देवेंद्र कुमार की याचिकाओं का संयुक्त निपटारा करते हुए एचएसएससी को निर्देश दिया कि दोनों याचिकाकर्ताओं को टीजीटी संस्कृत और टीजीटी साइंस पदों के लिए पात्र मानते हुए उनके मामलों पर विचार किया जाए। यदि उनके अंक संबंधित श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक हैं तो चार सप्ताह के भीतर उनकी नियुक्ति की संस्तुति करते हुए उचित आदेश पारित किया जाए।

    उनके वकील संसार कुंड़़ु ने कोर्ट को बताया कि उनके पास विज्ञापन में निर्धारित न्यूनतम योग्यता के बजाय उसी विषय में उच्च योग्यता है। मनीष कुमार के पास संस्कृत में एमए तथा देवेंद्र कुमार के पास भौतिकी में एमएससी की डिग्री है। इसके बावजूद उन्हें भर्ती प्रक्रिया में पात्र नहीं माना गया। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए चयन प्रक्रिया में सशर्त भाग लेने की अनुमति दी थी।

    बाद में दोनों ने कटआफ अंक भी पार कर लिए और दस्तावेजों की जांच के लिए बुलाए गए, लेकिन याचिका लंबित होने के कारण उनका परिणाम घोषित नहीं किया गया।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरियाणा सरकार के 25 मार्च 2016 के उन निर्देशों का उल्लेख किया, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अभ्यर्थी के पास निर्धारित न्यूनतम योग्यता के समान विषय में उच्च योग्यता है तो उसे संबंधित पद के लिए पात्र माना जाएगा और इस प्रावधान का सेवा नियमों तथा भर्ती प्रक्रिया में पालन किया जाना चाहिए। 

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    अदालत ने कहा कि अब यह विवाद शेष नहीं रहा कि समान विषय में उच्च योग्यता रखने वाला अभ्यर्थी केवल इस कारण अयोग्य नहीं माना जा सकता।

    हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोनों याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति होती है तो उन्हें वेतन वास्तविक कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से मिलेगा, लेकिन उनकी मेरिट के अनुसार जिस दिन उनके बैच के अन्य अभ्यर्थियों ने सेवा ज्वाइन की थी, उसी दिन से वरिष्ठता, वेतन निर्धारण सहित सभी काल्पनिक सेवा लाभ प्रदान किए जाएंगे।