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महेन्द्रगढ़ अवैध खनन: संदिग्ध याचिका पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख, फर्जीवाड़ा जांचने CBI को सौंपे आदेश

Published: Wed, 12 Aug 2026 11:18 AM (IST)

महेंद्रगढ़ में अवैध खनन से जुड़ी एक याचिका संदिग्ध पाई गई है, जिसमें याचिकाकर्ता को ही जानकारी नहीं थी।

फर्जीवाड़ा जांचने CBI को सौंपे आदेश (फाइल फोटो)

फर्जीवाड़ा जांचने CBI को सौंपे आदेश (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अवैध खनन याचिका में याचिकाकर्ता को जानकारी नहीं थी।

  2. हाई कोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए।

  3. याचिका दाखिल और वापसी की प्रक्रिया संदिग्ध।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। महेंद्रगढ़ जिले में अवैध खनन के संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल एक याचिका की सच्चाई पर उठे सवाल अब और गहरे हो गए हैं। हाई कोर्ट की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि याचिका में जिस व्यक्ति को याचिकाकर्ता बताया गया, उसे न तो याचिका दाखिल होने की जानकारी थी और न ही उसने इसे दाखिल करने के लिए किसी को अधिकृत किया था।

इस गंभीर मामले को देखते हुए कार्यवाहक चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को प्राथमिकी दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।

सीबीआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में खंडपीठ के समक्ष पेश की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता को याचिका दाखिल करने की जानकारी नहीं थी और उसने किसी को निर्देश या अधिकृत नहीं किया था।

प्रारंभिक जांच में गलत प्रस्तुतीकरण और रिकार्ड में हेरफेर के तथ्य सामने आए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है।पीठ ने याचिकाकर्ता और अन्य के खिलाफ चार अप्रैल को दर्ज प्राथमिकी की जांच भी सीबीआई को सौंप दी।

कोर्ट के समक्ष कहा गया था कि यह प्राथमिकी याचिकाकर्ता पर दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई थी। पीठ ने निर्देश दिया कि दोनों मामलों की जांच सीबीआई एक साथ करेगी और तीन महीने बाद इसकी रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की जाएगी।

यह मामला महेंद्रगढ़ के बखरीजा गांव में कथित अवैध खनन से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि खनन योजना, पर्यावरण मंजूरी प्रमाणपत्र और वैधानिक नियमों के विपरीत खनन किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने मुआवजा दिलाने और उसके घर से 250 मीटर के दायरे में अवैध खनन रोकने के निर्देश मांगे थे।

याचिका वापस लेने की कोशिश ने मामले को और संदिग्ध बना दिया। 16 अप्रैल को कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता याचिका आगे नहीं चलाना चाहता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में खुद को अनपढ़ बताया और यह नहीं बता सका कि याचिका क्यों दाखिल की गई और उसे वापस क्यों लिया जा रहा है।मामले में एक सतपाल सिंह की भूमिका भी संदिग्ध रही। पीठ ने कहा कि उसने याचिकाकर्ता से संबंध स्पष्ट नहीं किया।

कोर्ट ने याचिका और वकालतनामे पर हस्ताक्षरों में भी अंतर पाया। इन परिस्थितियों में पीठ ने याचिका दाखिल करने और उसे वापस लेने की प्रक्रिया को 'अत्यधिक संदिग्ध' बताया।पीठ ने स्पष्ट किया कि वह अज्ञात व्यक्तियों द्वारा गलत उद्देश्यों से फर्जी याचिकाएं दाखिल कराने की प्रक्रिया को स्वीकार नहीं कर सकती। अब सीबीआई दोनों प्राथमिकी की संयुक्त जांच कर मामले की वास्तविकता हाई कोर्ट के समक्ष रखेगी।