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    बेटों के बैंक खातों से मां को अपने आप मिलेगा गुजारा भत्ता, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

    Updated: Sat, 09 May 2026 11:18 PM (GMT+05:30)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बुजुर्ग विधवा मां को उसके दो बेटों से 30,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बेटों के बैंक ख ...और पढ़ें

    बेटों के बैंक खातों से मां को अपने आप मिलेगा गुजारा भत्ता। फाइल फोटो

    बेटों के बैंक खातों से मां को अपने आप मिलेगा गुजारा भत्ता। फाइल फोटो

    HighLights

    1. हाईकोर्ट ने मां के लिए 30,000 रुपये मासिक भत्ता तय किया।

    2. बेटों के बैंक खातों से ऑटो-डेबिट होगा गुजारा भत्ता।

    3. बुजुर्ग मां को जीवनयापन में नहीं होगी परेशानी।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। एक मां अपने बच्चों को मेहनत और लग्न के साथ पाल पोसकर बड़ा करती है। किसी भी तरह की दुख तकलीफ को झेलने के बावजूद बच्चों के लालन पोषण में कमी नहीं आने देती। बुढ़ापे में जाकर अगर उसे जीवनयापन में तकलीफों का सामना करना पड़े तो अदालत को चाहिए कि उस मां का सहयोग करे।

    इन टिप्पणियों के साथ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बुजुर्ग विधवा के लिए 30 हजार रुपये मासिक भरण पोषण भत्ता देने का आदेश दिया है। यह आदेश उन दो बेटों के लिए है, जिन्होंने भिवानी जिला अदालत के 13 हजार रुपये के मासिक भत्ते के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

    अपने फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भत्ता राशि बेटों के बैंक अकाउंट से प्रतिमाह आटो डेबिट करने की व्यवस्था की जाए, ताकि रकम सीधे बुजुर्ग मां के बैंक अकाउंट में पहुंच सके।

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की जस्टिस नीरजा के कलसन ने मामले की सुनवाई के दौरान नोट किया कि जिला अदालत के आदेश के बावजूद भत्ता नहीं दिया जा रहा था। बुजुर्ग मां की तरफ से अदालत को बताया गया कि उनके पास सरकार से मिलने वाली मासिक पैंशन के अलावा जीवनयापन की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार से जो पेंशन मिलती है उससे दवाओं या घर चलाने के अन्य खर्च पूरे नहीं हो पाते हैं।

    हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि दोनों बेटे सरकारी नौकरी करते हैं और बुजुर्ग मां का सहयोग करने में समर्थ हैं। सभी पक्षों को सुनने और तथ्यों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया।

    साथ ही रजिस्ट्री को कहा कि बेटों के बैंक अकाउंट की जानकारी लेकर उनमें से आटो डेबिट की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में बुजुर्ग महिला को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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