पंजाब-हरियाणा के मुख्य सचिवों, डीजीपी को अवमानना नोटिस; मनमानी गिरफ्तारियों पर हाईकोर्ट सख्त
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मनमानी गिरफ्तारियों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब और हरियाणा के मुख्य स ...और पढ़ें

हाईकोर्ट ने मनमानी गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट निर्देशों की अनदेखी पर नोटिस दिया (फाइल फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने मनमानी गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट निर्देशों की अनदेखी पर नोटिस दिया
पंजाब-हरियाणा के मुख्य सचिवों, डीजीपी को अवमानना नोटिस जारी किया गया
सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया गया
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मनमानी गिरफ्तारियों पर लगाम लगाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों व पुलिस महानिदेशकों को अवमानना नोटिस जारी किया है।
अदालत ने पूछा है कि बाध्यकारी दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। जस्टिस सुदप्ति शर्मा ने कहा कि राज्यों की ओर से दायर किए गए कंप्लायंस हलफनामे “अवज्ञा की स्वीकारोक्ति” जैसे प्रतीत होते हैं।
केवल दोषी पुलिस अधिकारियों को चार्जशीट देना अवमानना को समाप्त नहीं करता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की जिम्मेदारी सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर पर तय होगी।
मामला सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक निर्णय के अनुपालन से जुड़ा है। दो जुलाई 2014 के इस फैसले में शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि धारा 498-ए आईपीसी और सात वर्ष तक की सजा वाले अन्य अपराधों में पुलिस स्वत: गिरफ्तारी न करे।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी चेक लिस्ट तैयार कर गिरफ्तारी के कारण दर्ज करें और मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करते समय आवश्यक सामग्री प्रस्तुत करें। मजिस्ट्रेट को भी यांत्रिक ढंग से हिरासत की अनुमति नहीं देने और संतुष्टि दर्ज करने को कहा गया था।
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हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इन निर्देशों को सभी मुख्य सचिवों, डीजीपी और उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजा गया था, ताकि व्यापक अनुपालन सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद बार-बार अवमानना याचिकाएं दायर हो रही हैं, जो चिंताजनक है।
अदालत के समक्ष विचाराधीन अवमानना याचिका मूल रूप से हरियाणा के खिलाफ थी, लेकिन जस्टिस शर्मा ने कहा कि “समय की मांग” है कि पंजाब को भी पक्षकार बनाया जाए, क्योंकि वहां से भी इसी प्रकार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
हलफनामों के प्रारूप पर भी अदालत ने आपत्ति जताई। न्यायालय ने कहा कि लगभग सभी हलफनामों में एक ही पैरे में यह उल्लेख है कि संबंधित अधिकारियों को चार्जशीट कर दिया गया है। यह पर्याप्त नहीं है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं हो रहा तो इसकी जवाबदेही मुख्य सचिवों और डीजीपी पर तय होगी, जिन्हें अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
अदालत ने दोनों राज्यों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों और डीजीपी को विस्तृत और समग्र हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए उठाए गए ठोस कदमों का ब्यौरा हो।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था और विधि के शासन की मूल भावना के विपरीत है। ऐसे में अगर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो अवमानना कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।