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    हरियाणा में सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हाई कोर्ट सख्त, विशेष शिक्षक से लेकर खेल के मैदान तक; अब देना होगा एक-एक ब्योरा

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 02:37 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात और सुविधाओं पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को शिक्षा के ...और पढ़ें

    हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात पर हरियाणा सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी (फाइल फोटो)

    हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात पर हरियाणा सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी (फाइल फोटो)

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    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुपात को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप विस्तृत आंकड़े पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान दिए गए आदेश के बावजूद जवाब दाखिल न करने पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया तो अदालत इस मामले में सख्त आदेश जारी कर कार्रवाई कर सकती है।अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में 21 अप्रैल तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।

    इस हलफनामे में सरकारी स्कूलों में शिक्षक अनुपात और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से बताना होगी।पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि फरीदाबाद, नूंह (मेवात) और पलवल जिलों को छोड़कर राज्य के अन्य सभी जिलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत निर्धारित विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुपात के मानकों का पालन किया जा रहा है।

    हालांकि अदालत ने हलफनामे में दिए गए आंकड़ों की जांच के बाद पाया कि ये आंकड़े शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अनुसूची में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक (मिडिल) स्कूलों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इस पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर पूरी जानकारी प्रस्तुत करे। अदालत ने सरकार को यह बताने का निर्देश दिया कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कितने विशेष शिक्षा शिक्षक तैनात हैं।

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    इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि स्कूल भवन शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।हाई कोर्ट ने स्कूलों में शिक्षण-अधिगम उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यशील स्थिति पर भी जानकारी मांगी है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या स्कूलों में अधिनियम की अनुसूची के अनुसार लाइब्रेरी मौजूद हैं और उनमें पत्रिकाएं तथा कहानी की किताबें पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं या नहीं।इसके अलावा अदालत ने खेल और शारीरिक गतिविधियों से संबंधित सुविधाओं पर भी विस्तृत जानकारी मांगी है।

    सरकार को बताना होगा कि स्कूलों में खेल सामग्री, खेलकूद उपकरण और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं तथा क्या वे उपयोग के योग्य स्थिति में हैं।हाई कोर्ट ने 9 अगस्त 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के तहत शुरू की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति भी हलफनामे में बताने के निर्देश दिए हैं।गौरतलब है कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का स्वत संज्ञान लेते हुए अदालत ने इस मामले में सुनवाई शुरू की थी।

    रिपोर्ट में दावा किया गया था कि हरियाणा के कुछ जिलों में 500 विद्यार्थियों पर केवल एक शिक्षक कार्यरत है। अदालत के संज्ञान के अनुसार अंबाला, फरीदाबाद, सिरसा और यमुनानगर जैसे जिले इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित बताए गए हैं।