पैरालंपिक खिलाड़ी विनोद कुमार को झटका, विनेश फोगाट की तरह नहीं मिलेंगे चार करोड़ रुपये, हाई कोर्ट ने क्या कहा?
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पैरालंपिक खिलाड़ी विनोद कुमार की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने विनेश फोगाट की तरह 4 करोड़ रुपये की मांग की थी। ...और पढ़ें

पैरालंपिक खिलाड़ी विनोद कुमार को झटका (फाइल फोटो)
HighLights
हाई कोर्ट ने विनोद कुमार की वित्तीय लाभ याचिका खारिज की
विनेश फोगाट के समान 4 करोड़ रुपये की मांग थी
खिलाड़ी को पहले ही 50 लाख रुपये मिल चुके थे
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में हिस्सा लेने वाले पैरा एथलीट विनोद कुमार को बड़ा झटका देते हुए उनकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पहलवान विनेश फोगाट की तरह हरियाणा सरकार से समान आर्थिक लाभ देने की मांग की थी।
जस्टिस जगमोहन बंसल ने स्पष्ट कहा कि विनोद कुमार पहले ही अपनी वास्तविक पात्रता से कहीं अधिक लाभ प्राप्त कर चुके हैं, इसलिए उन्हें विनेश फोगाट के मामले का हवाला देकर अतिरिक्त राशि नहीं दी जा सकती।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विनोद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में एफ-52 वर्ग में कांस्य पदक जीता था, लेकिन विशेषज्ञ समिति द्वारा उन्हें अयोग्य घोषित किए जाने के बाद उनका पदक वापस ले लिया गया।
राज्य सरकार की पांच सितंबर 2019 की नीति के अनुसार वह केवल प्रतिभागी के रूप में 15 लाख रुपये के हकदार थे, लेकिन हरियाणा सरकार ने उनके मामले को विशेष श्रेणी का मानते हुए चौथे स्थान के समकक्ष 50 लाख रुपये की राशि प्रदान की।
लाभ उनकी निर्धारित पात्रता से काफी अधिक: हाई कोर्ट
अदालत ने कहा कि यह लाभ उनकी निर्धारित पात्रता से काफी अधिक था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक 2024 में रजत पदक वापस लिए जाने के बावजूद हरियाणा सरकार ने सिल्वर मेडलिस्ट मानकर चार करोड़ रुपये दिए, इसलिए विनोद कुमार को भी समानता के आधार पर वही लाभ मिलना चाहिए। इस पर राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि दोनों मामलों की समयावधि, परिस्थितियां और सरकारी नीतियां अलग हैं।
जस्टिस बंसल ने राज्य के पक्ष को स्वीकार करते हुए कहा कि अदालत सरकार को अपनी नीति से बाहर जाकर केवल इस आधार पर अतिरिक्त भुगतान करने का निर्देश नहीं दे सकती कि किसी अन्य खिलाड़ी को बाद में अलग परिस्थिति में अधिक लाभ दिया गया।
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अदालत ने कहा कि यदि इस प्रकार की मांग स्वीकार कर ली जाए तो भविष्य में हर खिलाड़ी बाद की नीतियों और पुरस्कार राशियों के आधार पर समानता का दावा करेगा, जिससे नीति व्यवस्था अस्थिर हो जाएगी।
पहले 50 लाख स्वीकार कर लिए थे
हाई कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि विनोद कुमार ने वर्ष 2021 में 50 लाख रुपये की राशि स्वीकार कर ली थी और उस समय कोई आपत्ति नहीं जताई थी। ऐसे में कई वर्ष बाद 2024 की घटना के आधार पर नई मांग न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। अदालत ने दोटूक कहा कि विनोद कुमार केवल टोक्यो पैरालंपिक 2020 के प्रतिभागियों से तुलना कर सकते हैं, पेरिस ओलिंपिक 2024 के खिलाड़ियों से नहीं।