23.56 करोड़ खर्च करने के बाद भी प्यासी रह गई हाली झील, CAG रिपोर्ट में उजागर हुआ मामला
पानीपत का ऐतिहासिक हाली पार्क और झील परियोजना आठ साल बाद भी अधूरी है। 23.56 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद झील में नियमित पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई।

23.56 करोड़ खर्च कर भी प्यासी रह गई हाली झील।
HighLights
हाली झील परियोजना 8 साल बाद भी अधूरी
23.56 करोड़ खर्च के बावजूद पानी नहीं
कैग रिपोर्ट ने प्रशासनिक खामियों पर सवाल उठाए
जागरण संवाददाता, पानीपत। शहर के बीचोंबीच स्थित ऐतिहासिक हाली पार्क और झील को आधुनिक पर्यटन एवं मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना आठ साल बाद भी अपने मूल उद्देश्य तक नहीं पहुंच सकी है।
वर्ष 2017 में 23.40 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट पर मार्च 2023 तक तय बजट से कई करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन झील में नियमित पानी की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी।
परिणामस्वरूप बोटिंग साइट, पार्क, कैफे, कियोस्क, ओपन एयर थियेटर और अन्य सुविधाएं पूरी क्षमता से उपयोग में नहीं आ पा रही हैं। हरियाणा विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने इस परियोजना की देरी और प्रशासनिक खामियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
2014 की घोषणा से 2026 तक, लंबा होता गया इंतजार
हाली झील के पुनर्विकास की शुरुआत दिसंबर 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा से हुई थी। इसके बाद नगर निगम ने करीब 28 एकड़ क्षेत्र में फैले पार्क और झील को आधुनिक स्वरूप देने की योजना बनाई।
दिसंबर 2016 में प्रशासनिक मंजूरी मिली और नवंबर 2017 में 23.40 करोड़ रुपये की तकनीकी स्वीकृति के बाद दिसंबर 2017 में निर्माण कार्य का ठेका दिया गया। ठेकेदार ने जनवरी 2018 में काम शुरू किया। अनुबंध के अनुसार अगस्त 2019 तक परियोजना पूरी हो जानी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के कई वर्ष बाद भी यह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।
झील से बोटिंग तक, आकर्षण बने लेकिन पानी नहीं पहुंचा
इस परियोजना में झील का सुंदरीकरण बोटिंग साइट, पार्क, गार्डन कैफे, कियोस्क, पार्किंग और ओपन एयर थियेटर जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। झील में पानी पहुंचाने के लिए दिल्ली पैरलल नहर से लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाने की योजना भी शामिल थी।
हालांकि, निर्माण कार्य आगे बढ़ता रहा, लेकिन पानी पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी। अगस्त 2022 में हुई थर्ड पार्टी जांच में भी लिफ्ट, रेलिंग और कुछ विद्युत कार्य अधूरे पाए गए।
चार विभागों की अनुमति लेने में बीत गए कई वर्ष
कैग रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम ने वन विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग और इंडियन आयल कार्पोरेशन से मंजूरी लेने के लिए जून 2018 से दिसंबर 2020 के बीच आवेदन किए। इनकी स्वीकृतियां दिसंबर 2022 तक मिलती रहीं। मंजूरियों में हुई देरी का सीधा असर पाइपलाइन और जल आपूर्ति योजना पर पड़ा।
बाद में मोटर और पाइपलाइन के माध्यम से झील तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए गए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। वर्ष 2023 में दिल्ली पैरलल नहर के चौड़ीकरण और संवर्धन कार्य शुरू होने के बाद पानी की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई।
अब सवाल सिर्फ खर्च का नहीं, जवाबदेही और भविष्य का भी
कैग ने स्पष्ट टिप्पणी की है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण परियोजना का मूल उद्देश्य हासिल नहीं हो सका। कैग रिपोर्ट ने एक बार फिर इस अधूरे प्रोजेक्ट को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
हाली झील में पार्क का निर्माण कार्य पूरा करवाया जा चुका है। पानी पहुंचाने के लिए हेल्थ शाखा अधिकारी प्रयासरत है। ओपन एयर थियेटर के लिए एस्टीमेट तैयार किया जा चुका है। जल्द की काम शुरू कर दिया जाएगा।- गोपाल कलावत, एक्सइएन नगर निगम पानीपत।
हाली झील का प्रोजेक्टर एक्सईएन गोपाल कलावत के पास है। उन्हीं को पानी लाने की भी जिम्मेदारी सौंपी हुई है। इसलिए इसके बारे में कलावत से संपर्क करें।- रूपेश, एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ शाखा, नगर निगम
